पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और पीएम मोदी की लीडरशिप में देश की इकॉनमी ने कैसा किया परफॉर्म? देखिए ये आंकड़े

PM MOdi 12 Years: आजादी के समय यानी साल 1947 में भारत की जीडीपी महज ₹2.7 लाख करोड़ अनुमानित थी। पहले प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरन भारत की औसत जीडीपी ग्रोथ रेट करीब 3.5% से 4% के आसपास बनी रही। इसके विपरीत, जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी आज बढ़कर करीब ₹357.14 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है, जिसने भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की कतार में ला खड़ा किया है

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 9:24 AM
पिछले 12 सालों में देश ने बुनियादी ढांचे से लेकर डिजिटल और औद्योगिक मोर्चे पर किस तरह लंबी छलांग लगाई है

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लगातार 4399 दिनों तक PM पद पर रहने का एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। इसके साथ ही वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत आज एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। आज जून 2026 में जब हम देश की जीडीपी और विकास दर के आंकड़ों को देखते हैं, तो पिछले दशकों में आया एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव साफ नजर आता है।

भारत की आर्थिक विकास यात्रा में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल दो अलग-अलग मील के पत्थर माने जाते हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि देश ने बुनियादी ढांचे से लेकर डिजिटल और औद्योगिक मोर्चे पर किस तरह लंबी छलांग लगाई है। आइए आपको बताते हैं इन दोनों नेताओ के कार्यकाल में देश की इकॉनमी ने कौन-कौन से नए कीर्तिमान हासिल किए।

₹2.7 लाख करोड़ से ₹357 लाख करोड़ की GDP का सफर


आजादी के समय यानी साल 1947 में भारत की जीडीपी महज ₹2.7 लाख करोड़ अनुमानित थी। पंडित नेहरू के दौर में देश बेहद सीमित संसाधनों और गरीबी से जूझ रहा था। उनके कार्यकाल के दौरान भारत की औसत जीडीपी ग्रोथ रेट करीब 3.5% से 4% के आसपास बनी रही, जिसे उस दौर में शुरुआती बुनियादी ढांचे को खड़ा करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

इसके विपरीत, जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी आज बढ़कर करीब ₹357.14 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है, जिसने भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की कतार में ला खड़ा किया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार न केवल बढ़ा है, बल्कि साल 2014-15 में जो नॉमिनल जीडीपी ₹106.57 लाख करोड़ थी, वह साल 2024-25 तक तीन गुना बढ़कर ₹331.03 लाख करोड़ के लेवल पर पहुंच गई।

वैश्विक संकटों के बीच भी तेज विकास दर

पंडित नेहरू के समय में वैश्विक स्तर पर शीत युद्ध का दौर था और देश आंतरिक मोर्चों पर अपनी अर्थव्यवस्था को संभाल रहा था। वहीं, पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत ने कोविड-19 महामारी, वैश्विक मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक संघर्षों और सप्लाई-चेन में आई बड़ी रुकावटों के बावजूद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा बनाए रखा है।

निर्यात और विदेशी निवेश में रिकॉर्ड उछाल

आजादी के शुरुआती दशकों में भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर था और विदेशी मुद्रा का संकट एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन पिछले एक दशक में भारत की वैश्विक व्यापारिक हिस्सेदारी बहुत मजबूत हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2013-14 में देश का कुल निर्यात जो US$ 468 बिलियन था, वह साल 2024-25 में करीब 76% बढ़कर US$ 825 बिलियन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी सर्विसेज एक्सपोर्ट की रही, जो US$ 158 बिलियन से दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर US$ 387 बिलियन हो गई।

विदेशी निवेश के मोर्चे पर भी भारत आज दुनिया के सबसे पसंदीदा देशों में शामिल है। दिसंबर 2024 तक संचयी एफडीआई प्रवाह करीब ₹89.85 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जिसमें से लगभग 67% हिस्सा (US$ 667.74 billion) केवल पिछले 10 वर्षों (2014-24) में प्राप्त हुआ है।

महंगाई पर लगाम और पीएसयू का कायाकल्प

साल 2004 से 2014 के बीच जहां देश में औसत खुदरा महंगाई दर 8.2% के उच्च स्तर पर थी, वहीं मोदी सरकार के पिछले एक दशक (2015-25) में इसे नियंत्रित कर औसतन 5% के दायरे में लाया गया है। साल 2024-25 में खुदरा महंगाई दर गिरकर 4.6% पर आ गई, जो 2018-19 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

इसके अलावा, सरकारी कंपनियों (CPSEs) की सेहत में भी बड़ा सुधार देखा गया है। साल 2014 में देश में महारत्न कंपनियों की संख्या केवल 7 थी, जो साल 2025 तक दोगुनी होकर 14 हो चुकी है। इस दौरान ऑपरेटिंग सरकारी कंपनियों का नेट प्रॉफिट ₹1.3 लाख करोड़ (FY14) से 149% बढ़कर ₹3.2 लाख करोड़ (FY24) पर पहुंच गया।

गवर्नेंस और मीडिया का माहौल: तब और अब

आर्थिक मोर्चे के अलावा दोनों नेताओं के काम करने के माहौल और गवर्नेंस में भी एक बड़ा अंतर रहा है। पंडित नेहरू ने एक ऐसे दौर में शासन किया जब देश में निजी समाचार चैनल, सोशल मीडिया या डिजिटल संचार जैसी चीजें मौजूद नहीं थीं, जिससे नीतियों पर जनता की प्रतिक्रिया आने में लंबा समय लगता था।

इसके ठीक उलट, पीएम मोदी आज के डिजिटल युग में शासन कर रहे हैं, जहां 24x7 मीडिया माहौल, सोशल मीडिया की सक्रियता और हर नीति की रीयल-टाइम डिजिटल समीक्षा होती है। इस पारदर्शी और त्वरित रिस्पॉन्स वाले माहौल में सरकार ने यूपीआई और जनधन जैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए देश के कोने-कोने तक वित्तीय समावेशन को पहुंचाया है, जिसके तहत अप्रैल 2025 तक जनधन खातों की संख्या 55.17 करोड़ को पार कर गई।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।