PM मोदी ने दिखाई भारत की पहली हाईड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी, जानिए इसकी 10 बड़ी खूबियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस उद्घाटन समारोह के दौरान जींद रेलवे स्टेशन पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने हाथ हिलाकर ट्रेन को विदा किया। ट्रेन में कई स्कूली बच्चे भी सवार थे।
First Hydrogen-Powered Train: भारतीय रेलवे के इतिहास में आज का दिन बेहद ऐतिहासिक और स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाई जा रही है। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के विशेष क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास हाइड्रोजन ट्रेनें मौजूद हैं। रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और सस्टेनेबल मोबिलिटी को अपनाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस उद्घाटन समारोह के दौरान जींद रेलवे स्टेशन पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने हाथ हिलाकर ट्रेन को विदा किया। ट्रेन में कई स्कूली बच्चे भी सवार थे।
जींद-सोनीपत रूट: 12 स्टेशनों पर ठहराव और 2 घंटे का सफर
पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच की 89 किलोमीटर की दूरी को 2 घंटे में तय करेगी। अपनी यात्रा के दौरान यह ट्रेन रास्ते में पड़ने वाले 12 स्टेशनों पर रुकेगी।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की 10 बड़ी खूबियां
पूरी तरह से 'मेड इन इंडिया' और स्वदेशी तकनीक से बनाई गई इस ट्रेन की 10 सबसे बड़ी खासियतें यहां नीचे देखिए-
यह ट्रेन पूरी तरह से भारत में ही डिजाइन, इंजीनियर और इंटीग्रेट की गई है। इसे विकसित करने में स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ये इस बात का प्रतीक है कि हाई एंड रेलवे इंजीनियरिंग की फील्ड में भारत अब तेजी से आगे बढ़ चुका है।
2- जीरो कार्बन एमिशन
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर काम करती है। यह तकनीक हाइड्रोजन को बिजली में बदलती है जिससे ट्रेन चलती है। इस पूरी प्रक्रिया में बाय प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ पानी की भाप निकलती है। इस दौरान कार्बन का उत्सर्जन बिल्कुल शून्य रहता है।
3- ओवरहेड बिजली के तारों से मुक्ति
पारंपरिक बिजली (इलेक्ट्रिक) ट्रेनों की तरह इस ट्रेन को चलाने के लिए लगातार ओवरहेड बिजली के तारों (इलेक्ट्रिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर) की आवश्यकता नहीं होती है। इसमें बिजली का निर्माण ट्रेन के भीतर ही हाइड्रोजन फ्यूल सेल के जरिए होता है।
4- प्रदूषण और बायोफ्यूल के इस्तेमाल से राहत
डीजल से चलने वाली ट्रेनों की तुलना में यह पूरी तरह से टेलपाइप उत्सर्जन (साइलेंसर से निकलने वाले धुएं) को खत्म करती है। इससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता है।
5- ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल
इस ट्रेन में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से उन थर्मल पावर प्लांटों से मिलने वाली बिजली पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी जो कोयले या दूसरे जीवाश्म ईंधनों से बिजली बनाते हैं। यह देश के टिकाऊ परिवहन की दिशा में बड़ा बदलाव है।
6- सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल
यह ट्रेन 10-कोच के कॉन्फिगरेशन (10 डिब्बों) के साथ तैयार की गई है। इतनी बड़ी क्षमता के साथ यह अब तक दुनिया भर में विकसित की गई सबसे लंबी हाइड्रोजन-संचालित यात्री ट्रेनों में से एक बन गई है।
7- बेहद शक्तिशाली प्रोपल्शन सिस्टम
ट्रेन में 3200 HP (हॉर्सपावर) का प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। इतनी अधिक पावर के कारण यह वर्तमान में दुनिया भर में चल रहे सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट्स में शुमार है।
8- आयातित ईंधन पर घटेगी निर्भरता
हाइड्रोजन तकनीक अपनाने से भारत की विदेशों से आयात होने वाले महंगे जीवाश्म ईंधनों (जैसे डीजल/क्रूड ऑयल) पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।
9- शोरमुक्त सफर
डीजल इंजनों की तुलना में यह ट्रेन बेहद शांत तरीके से पटरियों पर दौड़ती है। इसके चलने के दौरान होने वाला शोर काफी कम है। इससे यात्रियों को एक आरामदायक और शांत सफर का अहसास होगा।
10- आकर्षक स्काई-ब्लू और व्हाइट डिजाइन
यह नई मिसाइल जैसी अत्याधुनिक ट्रेन दिखने में भी बेहद खूबसूरत है। इसे एक बेहद आकर्षक स्काई-ब्लू (आसमानी नीले) और व्हाइट (सफेद) रंग की थीम में डिजाइन किया गया है।