जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर पीएम मोदी ने आज यूपी को बहुत बड़ी सौगात दी है। वहीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान एक जनसभा को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पहले अंधविश्वास और राजनीतिक डर की वजह से लंबे समय तक विकास से वंचित रहा।
पीएन मोदी अपने भाषण में समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले के समय में नोएडा को नजरअंदाज किया गया। मोदी ने कहा, “अंधविश्वास के कारण नोएडा को उसके हाल पर छोड़ दिया गया था।” उनका इशारा उस पुराने राजनीतिक सोच की ओर था, जिसमें यह माना जाता था कि जो नेता नोएडा जाता है, उसकी सत्ता चली जाती है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि पहले की सरकारों के नेता अपनी कुर्सी बचाने के डर से यहां आने से भी कतराते थे। इसी वजह से इस इलाके का विकास रुक गया था। अब हालात बदल रहे हैं और क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक निजी अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब उन्होंने नोएडा जाने का कार्यक्रम बनाया था। पीएम मोदी ने कहा कि उस समय के मुख्यमंत्री इस बात को लेकर काफी घबरा गए थे। उन्होंने न केवल उस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया, बल्कि उन्हें भी नोएडा न जाने के लिए समझाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री ने याद करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने उनसे कहा, “मोदी जी, नोएडा मत जाइए — आप अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हैं।” इस पर मोदी ने जवाब दिया, “मैं उस धरती का आशीर्वाद लेने जा रहा हूं, जो मुझे लंबे समय तक देश की सेवा करने का अवसर देगी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो इलाका कभी नेताओं के लिए डर और अंधविश्वास की वजह से दूर रहने की जगह माना जाता था, वही आज दुनिया का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अब यह क्षेत्र एक आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भारत की पहचान बन चुका है।
नोएडा को लेकर था ये अंधविश्वास
नोएडा को लेकर एक समय पर एक अजीब सा अंधविश्वास फैला हुआ था, जिसे “नोएडा का मनहूस साया” कहा जाता था। इस धारणा के अनुसार, जो भी मौजूदा मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, वह अगला विधानसभा चुनाव हार जाता है। करीब तीन दशकों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह बात काफी गंभीरता से ली जाती रही। बड़े-बड़े नेता भी इस डर की वजह से नोएडा जाने से बचते थे, जिससे इस इलाके के विकास पर भी असर पड़ा।
इस अंधविश्वास की शुरुआत जून 1988 में मानी जाती है, जब उस समय के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह नोएडा से लौटने के कुछ ही दिनों बाद अपने पद से हटा दिए गए। इसके बाद एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आए, जिससे यह धारणा और मजबूत होती चली गई। बताया जाता है कि 1989 में एन. डी. तिवारी, 1995 में मुलायम सिंह यादव, 1997 में मायावती और 1999 में कल्याण सिंह — ये सभी नेता नोएडा जाने के बाद सत्ता से बाहर हो गए। इससे लोगों के बीच यह विश्वास और गहरा हो गया कि नोएडा जाना नेताओं के लिए अशुभ है।
इस डर से बचने के लिए नेता कई बार अजीब फैसले भी लेते थे। इसी तरह, 2013 में अखिलेश यादव नोएडा में हुए एशियन डेवलपमेंट बैंक के एक बड़े कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, जबकि उस कार्यक्रम में उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुख्य अतिथि थे। अखिलेश यादव अक्सर लखनऊ से ही वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए परियोजनाओं का उद्घाटन कर देते थे, बजाय खुद नोएडा जाने के। यहां तक कि दादरी की घटना के पीड़ित परिवार को भी उनसे मिलने के लिए लखनऊ बुलाया गया, क्योंकि वे नोएडा जाने का जोखिम नहीं लेना चाहते थे।