पुणे और पिंपरी-चिंचवड इलाके से एक बेहद ही दर्दनाक और खौफनाक खबर सामने आई है। इस खबर ने पूरे महाराष्ट्र और देश को हिलाकर रख दिया है। यहां संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 17 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अब भी अस्पताल में अपनी जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं। इस खौफनाक हादसे के बाद पुणे के फुगेवाड़ी और हडपसर इलाकों में मातम पसरा हुआ है। इस बड़ी त्रासदी के बाद महाराष्ट्र सरकार तुरंत एक्शन मोड में आ गई है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए पूरी अवैध शराब के इकोसिस्टम को नेस्तनाबूद करने के आदेश दिए हैं।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक पिंपरी-चिंचवड के फुगेवाड़ी इलाके में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 7 लोगों की जान चली गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। पुणे के हडपसर के पंढरे माला इलाके में भी संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राकांपा (शरद चंद्र पवार) के नेता रोहित पवार ने इस घटना को बेहद भयानक बताते हुए दावा किया है कि हडपसर और फुगेवाड़ी इलाकों में जहरीली शराब पीने से अब तक कुल 18 लोगों की मौत हो चुकी है।
मुख्यमंत्री फडणवीस का कड़ा एक्शन: 8 आरोपी गिरफ्तार, बख्शा नहीं जाएगा कोई
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड पुलिस को तुरंत कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने साफ कहा है कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। राज्य आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त अभियान चलाकर मुख्य बुटलेगर सहित कुल 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। राज्य आबकारी आयुक्त अतुल कनाडे ने बताया कि फुगेवाड़ी और हडपसर दोनों ही इलाकों में जहरीली शराब की सप्लाई करने वाले मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े को हिरासत में लेकर पिंपरी-चिंचवड पुलिस को सौंप दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस को आदेश दिया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर सख्त से सख्त धाराएं लगाई जाएं। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि यह बेहद गंभीर घटना है। हमने इसके पीछे की पूरी इकोसिस्टम की पहचान कर ली है और पुलिस आबकारी विभाग के साथ मिलकर इसके जाल को खंगाल रही है।
शराब टॉक्सिक (जहरीली) है या नहीं, इसे कोई कैसे जाने?
पुणे के इस हादसे में शुरुआती जांच से पता चला है कि फुगेवाड़ी इलाके में जो शराब सप्लाई की गई थी उसमें मेथनॉल मिला हुआ था। मेथनॉल एक अत्यधिक जहरीला केमिकल है। इसका इस्तेमाल सिर्फ औद्योगिक कार्यों के लिए होता है, लेकिन अवैध शराब बनाने वाले मुनाफे के चक्कर में इसे मिला देते हैं। सामान्य तौर पर देखकर या सूंघकर जहरीली शराब की पहचान करना बेहद मुश्किल होता है, इसलिए इसकी जांच और इसके टॉक्सिक होने के लक्षणों के बारे में जानना बेहद जरूरी है-
1. शराब टॉक्सिक है या नहीं, जांचने के वैज्ञानिक तरीके
अगर सामान्य देसी या कच्ची शराब को हिलाने पर उसमें बहुत ज्यादा गाढ़ा झाग बनता है और वह झाग काफी देर तक टिका रहता है तो उसमें केमिकल या डिटर्जेंट जैसी अशुद्धियों की मिलावट हो सकती है। शराब में मेथनॉल या अन्य जहरीले तत्वों की सटीक पहचान केवल फॉरेंसिक या आबकारी विभाग की लैब जांच से ही संभव हो पाती है। आज के समय में कुछ खास केमिकल स्ट्रिप्स (जांच पट्टियां) भी आती हैं, जो मेथनॉल के संपर्क में आते ही रंग बदल देती हैं। हालांकि एथनॉल और मेथनॉल की गंध लगभग समान होती है, लेकिन शराब में से पेंट थिनर, नेल पॉलिश रिमूवर या बहुत ज्यादा कड़वी/तीखी रासायनिक गंध आ रही हो तो वह पूरी तरह से मिलावटी और टॉक्सिक हो सकती है।
2. टॉक्सिक शराब पीने के शुरुआती और गंभीर लक्षण
अगर किसी व्यक्ति ने अनजाने में जहरीली शराब पी ली है तो उसके शरीर में तुरंत इसके लक्षण दिखने लगते हैं। इसके लक्षण में सिर में तेज दर्द होना, अत्यधिक चक्कर आना, जी मिचलाना और लगातार उल्टी होना जैसी चीजें शामिल हैं। इसके गंभीर लक्षणों में आंखों के आगे धुंधलापन छा जाना या पूरी तरह से अंधापन होना, पेट में तेज ऐंठन और दर्द, सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होना जैसी चीजें शामिल हैं। दम घुटना, शरीर का नीला पड़ना और समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति कोमा में चला जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है।
बचाव और सावधानी: तुरंत क्या करें?
लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही लें: अवैध और स्थानीय स्तर पर बिना किसी सरकारी लेबल या बारकोड के बेची जाने वाली कच्ची/देसी शराब (Hooch) का सेवन बिल्कुल न करें। हमेशा सरकार द्वारा अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही प्रामाणिक उत्पाद खरीदें। अगर शराब पीने के बाद किसी भी व्यक्ति को जरा सा भी धुंधला दिखाई देने लगे या पेट में असहज दर्द हो तो बिना एक मिनट गंवाए उसे तुरंत नजदीकी बड़े अस्पताल (आईसीयू सुविधा वाले) ले जाएं। जहरीली शराब के मामलों में शुरुआती 2 से 4 घंटे मरीज की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।