पिछले साल पूरे देश को हिलाकर रख देने वाला राजा रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। इस हत्याकांड के फिर से चर्चा में आने की वजह है सोनम रघुवंशी को जमानत मिलना। बता दें कि, सोनम रघुवंशी पर साल 2025 में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है। वहीं बीते 28 अप्रैल को मेघालय की एक अदालत ने जमानत दे दी। वहीं सोनम को जमानत मिलने के बाद कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं। राजा के परिवार ने सवाल उठाया कि सोनम रघुवंशी को आखिर जमानत कैसे मिल गई, जब वह गुनहगार है?
320 दिनों बाद जेल से बाहर आई सोनम रघुवंशी
राजा के मर्डर की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के करीब 320 दिन बाद जमानत मिलने के पीछे पुलिस के बड़ी गलती सामने आई है। सोनम को जमानत देते हुए, अदालत ने शर्त रखी है कि ट्रायल के दौरान सोनम को शिलॉन्ग में ही रहना होगा। शिलॉन्ग कोर्ट ने सोमवार को उसकी जमानत मंजूर कर ली। मंगलवार को सोनम के पिता देवी सिंह शिलॉन्ग पहुंचे और जमानत भर दी। इसके बाद मंगलवार शाम को सोनम जेल से रिहा हो गई। बता दें कि कोर्ट ने चौथी सुनवाई के बाद सोनम को राहत दी है।
पुलिस की एक गलती से मिली जनामत
सोनम को ये जमानत पुलिस की एक बड़ी लापरवाही के कारण मिली। दरअसल, पुलिस ने गिरफ्तारी के समय जो दस्तावेज (गिरफ्तारी मेमो) तैयार किया था, उसमें गंभीर गलती पाई गई। उसमें ‘भारतीय न्याय संहिता’ की धारा 403(1) लिखी गई थी, जबकि ऐसी कोई धारा मौजूद ही नहीं है। अदालत ने इस गलती को गंभीर मानते हुए कहा कि सही धारा का उल्लेख होना जरूरी है। हत्या जैसे मामले में लागू होने वाली सही धारा 103(1) है, लेकिन पुलिस ने गलत धारा लिख दी। इसी लिपिकीय (कागजी) गलती के चलते अदालत ने सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी।
अदालत के आदेश के मुताबिक, सोनम रघुवंशी से जुड़े कई अहम दस्तावेजों में बड़ी गलती पाई गई। गिरफ्तारी मेमो, निरीक्षण मेमो, अधिकारों की जानकारी देने वाले मेमो और यहां तक कि केस डायरी की एंट्री में भी “भारतीय न्याय संहिता” की ऐसी धारा 403(1) लिखी गई थी, जो असल में मौजूद ही नहीं है। यह जानकारी ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट में सामने आई। पुलिस ने अपनी सफाई में कहा कि यह सिर्फ एक “लिपिकीय त्रुटि” यानी लिखने में हुई गलती थी। लेकिन अदालत ने इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अदालत ने साफ कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के सही और ठोस कारण नहीं बताए गए थे, जो कि कानून के हिसाब से जरूरी होता है।
इसी आधार पर अदालत ने सोनम रघुवंशी को ज़मानत दे दी। साथ ही, जमानत देते समय कुछ शर्तें भी तय की गईं। अदालत ने निर्देश दिया कि सोनम रघुवंशी बिना पहले से अनुमति लिए शिलांग शहर छोड़कर कहीं नहीं जा सकती। सोनम रघुवंशी के भाई गोविंद रघुवंशी ने साफ कहा है कि ज़मानत पर रिहा होने के बाद परिवार उसे घर में नहीं रखेगा।इंडिया टुडे के मुताबिक, गोविंद रघुवंशी ने कहा, “हम अभी उसे अपने घर पर नहीं रखेंगे। अगर मेरे माता-पिता उसे घर लाने का फैसला भी करते हैं, तो मैं खुद घर पर नहीं रहूंगा।”
सोनम रघुवंशी पर आरोप है कि उसने साल 2025 में शिलांग में अपने हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची। दोनों की शादी मई 2025 में हुई थी, जिसके बाद वे हनीमून मनाने मेघालय गए थे। कुछ ही दिनों बाद राजा रघुवंशी के लापता होने की खबर सामने आई। इसके बाद 2 जून को एक खाई में उसका शव मिला, जिससे मामला और गंभीर हो गया। पुलिस के मुताबिक, सोनम रघुवंशी ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की योजना बनाई थी। इस मामले में सोनम रघुवंशी समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तारी किया गया था।