यूपी के सीतापुर में सेना की खाली जमीन पर लगेगा देश का पहला सबसे अनोखा सोलर प्रोजेक्ट, बचेंगे करोड़ों रुपये!

Solar Project Sitapur UP: यह कदम पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ सरकार के पैसों की भी भारी बचत कराएगा। फिलहाल सेना के प्रतिष्ठानों और छावनियों के लिए ग्रिड से महंगी दरों पर बिजली खरीदी जाती है। इस सोलर प्लांट के शुरू होने के बाद बिजली खरीद पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे इस प्रोजेक्ट के पूरे लाइफ-साइकिल के दौरान सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की बचत होगी

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 3:42 PM
इससे न केवल एनर्जी सिक्योरिटी मजूबत होगी बल्कि खाली पड़े डिफेंस लैंड का इस्तेमाल भी होगा

BESS Solar Project: देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में लगभग 850 एकड़ खाली रक्षा भूमि पर 250 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इससे न केवल एनर्जी सिक्योरिटी मजूबत होगी बल्कि खाली पड़े डिफेंस लैंड का इस्तेमाल भी होगा।

पीआईबी के प्रेस रिलीज के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय द्वारा अपनी तरह का यह पहला बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसमें सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को भी जोड़ा गया है।

BESS की क्या है खासियत और फायदे?


आमतौर पर सोलर प्लांट सिर्फ धूप रहने तक यानी दिन में ही बिजली सप्लाई कर पाते हैं, लेकिन इस प्रोजेक्ट में 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम' (BESS) को शामिल किया गया है। दिन के समय बनने वाली अतिरिक्त बिजली को इन बड़ी बैटरियों में स्टोर कर लिया जाएगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मौसम खराब होने पर या रात के समय भी उत्तर प्रदेश के तमाम सैन्य ठिकानों को बिना किसी रुकावट के क्लीन और ग्रीन एनर्जी की सप्लाई मिलती रहेगी।

सरकारी खजाने को होगी भारी बचत, कम होगा बिजली का बिल

यह कदम पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ सरकार के पैसों की भी भारी बचत कराएगा। वर्तमान में सेना के प्रतिष्ठानों और छावनियों के लिए ग्रिड से महंगी दरों पर बिजली खरीदी जाती है।

इस सोलर प्लांट के शुरू होने के बाद बिजली खरीद पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे इस प्रोजेक्ट के पूरे लाइफ-साइकिल के दौरान सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की बचत होगी।

NTPC करेगी इस मेगा प्रोजेक्ट का निर्माण

इस महापरियोजना को धरातल पर उतारने का जिम्मा देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड को सौंपा गया है। सबसे सस्ती और बेहतरीन बिजली दरें हासिल करने के लिए एनटीपीसी इसे एक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए विकसित करेगी।

इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय (सेना) और रक्षा संपदा महानिदेशालय (DGDE) आपस में मिलकर काम कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम है।

भविष्य के लिए बनेगा रोल मॉडल

सीतापुर का यह सोलर-प्लस-स्टोरेज प्रोजेक्ट रक्षा क्षेत्र के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों में मौजूद सैन्य छावनियों की खाली जमीनों पर भी इसी मॉडल को अपनाकर ऐसे ही हाई-टेक रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाए जाएंगे।

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