Sadhvi Prem Baisa Death: पिता, कंपाउंडर और आश्रम का कर्मचारी, साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की जांच के दायरे में आए ये तीन लोग

Prem Baisa Death Case: पुलिस के अनुसार, पाल रोड स्थित साध्वी प्रेम बाईसा के आश्रम में उन्हें बुखार और सर्दी की शिकायत थी। आश्रम में ही इलाज के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया

अपडेटेड Feb 02, 2026 पर 9:13 PM
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Sadhvi Prem Baisa Death: साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की जांच के दायरे में आए ये तीन लोग

राजस्थान में 25 साल की कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के मामले में जांच अब तीन लोगों पर आकर टिक गई है। पुलिस के मुताबिक, 28 जनवरी की शाम साध्वी के आश्रम में मौजूद इन तीन लोगों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। इनमें साध्वी के पिता, इंजेक्शन लगाने वाला कंपाउंडर और आश्रम का घरेलू कर्मचारी शामिल हैं। जोधपुर पुलिस ने कहा है कि पोस्टमॉर्टम, टॉक्सिकोलॉजी और दूसरी फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जाएगा।

क्या हुआ था उस दिन?

पुलिस के अनुसार, पाल रोड स्थित साध्वी प्रेम बाईसा के आश्रम में उन्हें बुखार और सर्दी की शिकायत थी। आश्रम में ही इलाज के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


ACP (वेस्ट) छवि शर्मा ने बताया कि शाम करीब 6 बजे साध्वी को उनके पिता और एक युवक अस्पताल लेकर पहुंचे थे।

इलाज के दौरान अचानक बिगड़ी हालत

शुरुआती जांच में सामने आया है कि साध्वी को दिन में सर्दी या बुखार के लक्षण थे। आश्रम में ही दवाएं दी गईं और बाद में एक कंपाउंडर को इंजेक्शन लगाने के लिए बुलाया गया।

इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनटों बाद साध्वी की हालत तेजी से बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं।

साध्वी की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में उनके अनुयायी आश्रम पहुंच गए। लोगों ने नारेबाजी की और निष्पक्ष जांच की मांग की।

तीन लोग जांच के दायरे में

पुलिस जांच अब मुख्य रूप से तीन लोगों के इर्द-गिर्द घूम रही है:

1. पिता वीरम नाथ

साध्वी के पिता वीरम नाथ आश्रम में ही अपनी बेटी के साथ रहते थे। उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत देकर पूरी घटना का विवरण दिया है।

उनके अनुसार, 28 जनवरी की सुबह साध्वी को हल्की सर्दी थी, जो गंभीर नहीं लग रही थी। सुबह करीब 11:54 बजे उन्होंने कंपाउंडर देवी सिंह को फोन किया। देवी सिंह ने बताया कि वह अस्पताल में हैं और शाम को आने को कहा।

शाम करीब 5:10 से 5:15 बजे के बीच देवी सिंह आश्रम पहुंचे। उन्होंने मशीन से जांच कर हालत सामान्य बताई और साध्वी के दाहिने हाथ में इंजेक्शन लगाया। इसके बाद कुछ गोलियां दीं और 500 रुपये फीस लेकर चले गए।

वीरम नाथ के मुताबिक, इंजेक्शन के करीब 9 मिनट बाद साध्वी की हालत बिगड़ गई। वह रोने लगीं और सांस लेने में परेशानी बताने लगीं। रास्ते में उन्होंने कंपाउंडर को फोन कर इंजेक्शन पर सवाल भी उठाया।

अस्पताल पहुंचने के कुछ मिनट बाद ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पिता ने कंपाउंडर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

2. कंपाउंडर देवी सिंह

इस मामले में दूसरा अहम व्यक्ति देवी सिंह है, जिसने इंजेक्शन लगाया था। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है।

पुलिस उसकी योग्यता, नर्सिंग डिग्री, इलाज करने की अनुमति और इस्तेमाल की गई दवाओं की जानकारी जुटा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि इंजेक्शन और दवाएं सही मात्रा में दी गई थीं या नहीं।

देवी सिंह का कहना है कि उसने सामान्य इलाज किया और वह पहले भी साध्वी और उनके परिवार का इलाज करता रहा है।

3. आश्रम का कर्मचारी सुरेश

तीसरा व्यक्ति सुरेश है, जो आश्रम में खाना बनाने और रोजमर्रा के काम देखता था। उसने पुलिस को बताया कि साध्वी 27 जनवरी की रात अजमेर से लौटी थीं।

28 जनवरी की सुबह उन्होंने गले में दर्द की शिकायत की थी और घरेलू काढ़ा भी पिया था। शाम करीब 5 बजे साध्वी ने उसे फोन कर बताया कि डॉक्टर आ गए हैं और गेट खोलने को कहा।

सुरेश के अनुसार, इंजेक्शन के कुछ मिनट बाद उसने साध्वी की चीख सुनी और देखा कि वह गिर पड़ी हैं। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

उसने यह भी दावा किया कि रास्ते में साध्वी सांस लेने के लिए संघर्ष कर रही थीं और उनके नाखून नीले पड़ गए थे।

खाने के सैंपल भी जब्त

पुलिस ने आश्रम में बनाए गए खाने के सैंपल भी जब्त कर लिए हैं। यह खाना उसी दिन सुबह सुरेश ने तैयार किया था। इन सैंपलों की भी जांच कराई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत प्राकृतिक थी, मेडिकल लापरवाही से हुई या किसी और वजह से।

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