सोशल मीडिया पर मैकडॉनल्ड्स इंडिया (McDonald's India) से जुड़ा एक पोस्ट इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल पोस्ट में एक कथित इंटर्न ने आरोप लगाया है कि उसे कई महीनों तक किए गए काम का भुगतान नहीं किया गया और आर्थिक मजबूरी के चलते उसे दो अतिरिक्त नौकरियां तक करनी पड़ीं। हैरानी की बात यह है कि यह दावा McDonald's India के आधिकारिक X हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए किया गया। हालांकि, McDonald's India ने इस पोस्ट को कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया से डिलीट कर दिया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
क्या है वायरल पोस्ट में दावा?
वायरल स्क्रीनशॉट में एक कथित इंटर्न ने McDonald’s India के सोशल मीडिया अकाउंट से ट्वीट कर शिकायत दर्ज कराई है। पोस्ट में दावा किया गया है कि वह कंपनी में इंटर्न के तौर पर काम कर रहा था। लेकिन दिसंबर 2025 से उसका भुगतान नहीं किया गया। कथित इंटर्न ने यह भी दावा किया कि वह McDonald’s के कई एशियाई अकाउंट संभाल रहा था।
लेकिन इसके बावजूद उसके काम का भुगतान नहीं किया गया। आर्थिक स्थिति संभालने के लिए उसे दो अतिरिक्त नौकरियां करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यही दावा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। इसे लेकर इंटर्नशिप, स्टाइपेंड और कंपनियों में युवाओं के साथ होने वाले व्यवहार पर बहस शुरू हो गई है।
इंटर्नशिप या बिना भुगतान के काम?
इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है अगर किसी इंटर्न से नियमित कर्मचारी की तरह काम लिया जा रहा है, जिम्मेदारियां दी जा रही हैं और लंबे समय तक काम कराया जा रहा है, तो क्या उसे उचित स्टाइपेंड या भुगतान नहीं मिलना चाहिए? भारत में इंटर्नशिप को लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर बहस होती रही है। LinkedIn पर युवाओं की कई पोस्ट में ऐसे अनुभव शेयर किए गए हैं, जिनमें लंबे समय तक बिना भुगतान काम, फुल-टाइम उपलब्धता और वास्तविक सीखने के बजाय नियमित काम करवाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
वायरल दावे के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं मुख्य रूप से दो हिस्सों में नजर आती हैं। एक वर्ग ने कथित इंटर्न का समर्थन करते हुए कहा कि बड़ी कंपनियों से युवाओं को बेहतर कार्य-संस्कृति और भुगतान की उम्मीद होती है। यूजर्स का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो कंपनी को मामले की जांच कर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
वहीं, कुछ यूजर्स ने बिना पूरी जानकारी के कंपनी को दोषी ठहराने से बचने की सलाह दी। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी स्क्रीनशॉट या पोस्ट को आखिरी सच मानने से पहले संबंधित कंपनी और कथित इंटर्न दोनों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
McDonald’s के लिए क्यों अहम है मामला?
यह मामला ऐसे समय में चर्चा में आया है जब कंपनियों में इंटर्नशिप को लेकर युवाओं की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। किसी बड़े ब्रांड के साथ इंटर्नशिप को छात्र और युवा अक्सर अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं। McDonald’s India से जुड़ी इंटर्नशिप के पुराने रिकॉर्ड भी बताते हैं कि कंपनी के साथ विभिन्न समय पर इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध रहे हैं।
कुछ भूमिकाओं में स्टाइपेंड भी दिया गया था। उदाहरण के तौर पर 2017 के एक Internshala रिकॉर्ड में McDonald’s India (South & West) की HR इंटर्नशिप के लिए ₹7,500-15,000 मासिक स्टाइपेंड का उल्लेख था। इसलिए वायरल पोस्ट में लगाए गए वर्तमान आरोपों और कंपनी की सामान्य इंटर्नशिप नीतियों को एक ही चीज मानना सही नहीं होगा।
क्या कंपनी की ओर से कोई जवाब आया?
फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय सार्वजनिक स्रोतों में इस वायरल आरोप पर McDonald’s India का स्पष्ट आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि कथित इंटर्न को वास्तव में महीनों तक भुगतान नहीं किया गया या कंपनी ने जानबूझकर ऐसा किया। पूरे मामले की सच्चाई सामने आने के लिए कथित इंटर्न की पहचान, उसका ऑफर/इंटर्नशिप दस्तावेज, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।