SIR 2.0: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के दूसरे चरण के बाद एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। देश के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 3.67 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 10% हिस्सा है। नाम हटाए जाने की मुख्य वजहों में मतदाताओं की मृत्यु, स्थायी रूप से पता बदलना और डुप्लीकेट एंट्रीज शामिल है। इस शुद्धिकरण प्रक्रिया का अगला चरण जनवरी से शुरू होगा, जिसके बाद फरवरी 2026 में फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।
तमिलनाडु और गुजरात में सबसे बड़ी कटौती
वोटर लिस्ट में सुधार के मामले में दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए है:
तमिलनाडु: यहां सूची से सर्वाधिक 97 लाख से अधिक नाम हटाए गए है।
गुजरात: यहां 5.08 करोड़ वोटरों में से 73.73 लाख (करीब 14.5%) नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए है।
पश्चिम बंगाल: करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश: राजस्थान में लगभग 44 लाख और मध्य प्रदेश में 42.74 लाख नाम हटाए गए हैं।
लक्षद्वीप से पुडुचेरी तक क्या है केंद्र शासित प्रदेशों का हाल?
छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में भी बड़ी संख्या में गड़बड़ियां पाई गईं:
पुडुचेरी और गोवा: दोनों ही राज्यों में 1-1 लाख से अधिक वोटरों के नाम हटाए गए है।
अंडमान और निकोबार: यहां प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ी कटौती हुई है। करीब 64 हजार यानी करीब 20.62% नाम हटा दिए गए है।
लक्षद्वीप: करीब 1,600 मतदाताओं के नाम हटाए गए है।
जनवरी से फरवरी में होने वाले SIR का शेड्यूल
निर्वाचन आयोग की यह 'SIR 2.0' प्रक्रिया 321 जिलों और 1,843 विधानसभा क्षेत्रों में चल रही है। अगले साल 22 जनवरी से 14 फरवरी 2026 विशेष अभियान का दूसरा चरण चलेगा। इसके साथ ही 21 फरवरी 2026 को इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अंतिम चुनावी वोटर लिस्ट पब्लिश की जाएगी।