भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार कोआसाराम बापू को फिलहाल राहत दे दी है। कोर्ट ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि अहमदाबाद में उनके आश्रम से जुड़ी जमीन और संपत्तियों पर कोई भी जबरदस्ती कार्रवाई न की जाए। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि अभी ‘यथास्थिति’ बनाए रखी जाए। इस फैसले का मतलब है कि गुजरात हाई कोर्ट के 17 अप्रैल के आदेश के बाद शुरू हुई सभी कानूनी प्रक्रियाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पहली नजर में नगर निगम द्वारा जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ में जरूरी जानकारी पूरी तरह नहीं दी गई लगती है। ऐसे में जिस आधार पर कार्रवाई की बात की जा रही है, उस पर भी सवाल उठते हैं।
यह मामला आसाराम के आश्रम के पास की जमीन और संपत्तियों से जुड़ा है। इन संपत्तियों में कथित गड़बड़ियों के कारण नगर निगम अधिकारियों की नजर पड़ी थी। नगर निगम ने इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई और मामला आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। आसाराम, जो एक समय देशभर में बड़ी संख्या में अनुयायियों वाले मशहूर धार्मिक गुरु थे, पिछले करीब दस साल से कई कानूनी मामलों में घिरे हुए हैं। साल 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने उन्हें एक बलात्कार मामले में दोषी ठहराया था। तब से वे आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।ट
देश के कई हिस्सों में चल रहे हैं मामले
देश के अलग-अलग हिस्सों में आसाराम बापू के आश्रमों से जुड़ी जमीन को लेकर भी कई मामले चल रहे हैं। इन मामलों में जमीन के गलत इस्तेमाल, अतिक्रमण और स्थानीय नियमों के उल्लंघन जैसे आरोप शामिल हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। दोषी ठहराए जाने के बाद भी उनके ट्रस्ट और संस्थानों की संपत्तियों को लेकर विवाद अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि जांच पूरी होने तक अस्थायी राहत देने के लिए है। कोर्ट के इस आदेश से यह साफ हो गया है कि अगली सुनवाई तक अहमदाबाद स्थित आश्रम की संपत्तियों पर कोई तुरंत कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे इन संपत्तियों को संभालने वाले ट्रस्ट को फिलहाल राहत मिली है।