सुप्रीम कोर्ट के जज भी अब करेंगे कार पूलिंग, वर्क फ्रॉम होम! SC के इस सर्कुलर को 3 पॉइंट्स में समझिए

यह आदेश भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की ओर से 12 मई 2026 को जारी किए गए एक आधिकारिक ज्ञापन के आलोक में लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में आमतौर पर सोमवार और शुक्रवार को “मिसलेनियस डे” माना जाता है। इन दिनों नई याचिकाओं की शुरुआती सुनवाई होती है, जिनमें स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) और रिट याचिकाएं शामिल रहती हैं

अपडेटेड May 15, 2026 पर 5:19 PM
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सुप्रीम कोर्ट के जज भी अब करेंगे कार पूलिंग, वर्क फ्रॉम होम!

देश में ईंधन की खपत को कम करने और प्रशासनिक कामकाज को आधुनिक बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। 15 मई 2026 को जारी एक नए आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, अब हफ्ते के 'मिसलेनियस' (Miscellaneous) दिनों पर अदालती कार्यवाही पूरी तरह से वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संचालित की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में आमतौर पर सोमवार और शुक्रवार को “मिसलेनियस डे” माना जाता है। इन दिनों नई याचिकाओं की शुरुआती सुनवाई होती है, जिनमें स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) और रिट याचिकाएं शामिल रहती हैं।

1. जजों ने पेश की मिसाल: करेंगे कार-पूलिंग

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने पर्यावरण संरक्षण और ईंधन के बेहतर उपयोग के लिए एक अनुकरणीय निर्णय लिया है । सभी न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है कि वे अब अदालत आने-जाने के लिए आपस में कार-पूलिंग (एक ही गाड़ी में साझा यात्रा) करेंगे । यह कदम सरकारी संसाधनों का सीमित इस्तेमाल करने का एक बड़ा संदेश देता है।


2. वर्चुअल सुनवाई के लिए नए निर्देश

सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि सोमवार, शुक्रवार और अन्य आंशिक कार्य दिवसों (Partial Working Days) पर होने वाली सभी सुनवाई अब केवल वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी।

कोर्ट की रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि वीडियो लिंक समय पर भेजे जाएं और सुनवाई के दौरान किसी भी तकनीकी बाधा को दूर करने के लिए तकनीकी सहायता टीम मुस्तैद रहे।

3. कर्मचारियों के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' की सुविधा

अदालती कामकाज को सुचारू रखने के लिए कर्मचारियों के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है:

  • रोस्टर प्रणाली: रजिस्ट्री के हर विभाग में 50% तक कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन घर से काम (Work From Home) करने की अनुमति दी गई है।
  • शर्तें: घर से काम कर रहे कर्मचारियों को फोन पर उपलब्ध रहना होगा और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय ऑफिस बुलाया जा सकता है।
  • निगरानी: संबंधित रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करेंगे कि इस व्यवस्था से काम की गुणवत्ता पर असर न पड़े और वे जरूरत पड़ने पर इस व्यवस्था में बदलाव भी कर सकते हैं।

क्यों लिया गया यह फैसला?

यह आदेश भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की ओर से 12 मई 2026 को जारी किए गए एक आधिकारिक ज्ञापन के आलोक में लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के महासचिव भरत पराशर द्वारा जारी यह सर्कुलर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

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