सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की याचिका पर अंतरिम आदेश नहीं दिया, जानें कोर्ट में क्या-क्या हुआ

Supreme Court on CEC Gyanesh Kumar: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ECI, ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस ECI के उन फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर जारी किया गया है, जो कथित तौर पर एकतरफा तरीके से लिए गए थे

अपडेटेड Oct 05, 2026 पर 2:05 PM
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Supreme Court on CEC Gyanesh Kumar: सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है

Supreme Court on CEC Gyanesh Kumar: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI), CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस ECI के उन फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर जारी किया गया है, जो कथित तौर पर एकतरफा तरीके से लिए गए थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने भारत के चुनाव आयोग में बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए।

चीज जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर भारत के चुनाव आयोग (ECI) से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि अगर चुनाव आयोग का जवाब देखने के बाद उसे लगता है कि CEC ने कुछ फैसले बिना जरूरी आम सहमति के लिए थे, तो वह उन फैसलों पर दोबारा विचार कर सकता है या उन्हें वापस ले सकता है।

'आयोग के फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए'


CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ वकील विकास सिंह की दलीलों पर गौर करते हुए केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा है। पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि वह यह मानकर चल रही है कि आयोग के सभी फैसले इसी प्रक्रिया के तहत लिए गए।

'...तो हम उन फैसलों को वापस ले लेंगे'

कोर्ट ने कहा, "नोटिस के बाद, अगर वे आकर दिखाते हैं कि ABC फैसले बिना आम सहमति के लिए गए थे, तो हम उन फैसलों को वापस ले लेंगे।" इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI), ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस SIR से जुड़े उन फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जारी किया गया है, जो कथित तौर पर चुनाव आयोग के नाम पर एकतरफा तरीके से लिए गए थे।

इसी के साथ अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि यदि निर्वाचन आयोग का कोई फैसला कानून के अनुरूप नहीं मिला तो उसे रद्द कर देंगे। सीईसी के निलंबन की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और केंद्र को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा है। देश की सर्वोच्च अदालत ने ज्ञानेश कुमार को भी नोटिस जारी किया है!

याचिका में क्या मांग की गई थी?

पटना के रहने वाले राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह तय करने का अनुरोध किया गया था कि क्या सीईसी कुमार अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कानूनी तौर पर पूरे निर्वाचन आयोग की है। अगर ऐसा है तो उन कार्यों को अनधिकृत घोषित किया जाए और उपयुक्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

CEC कुमार को निलंबित करने की मांग

याचिका में शीर्ष अदालत से यह अनुरोध किया गया है निर्वाचन आयोग के बहु-सदस्यीय स्वरूप को बनाए रखने के लिए याचिका की अंतिम सुनवाई तक कुमार को निलंबित रखा जाए। यह याचिका अंग्रेजी दैनिक 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद दायर की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त संधू और जोशी ने पिछले 10 माह में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी। उनका दावा है कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या अनुशंसा के बिना जारी किए गए थे।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

आलोचनाओं का सामना कर रहे, निर्वाचन आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना एक सामान्य बात है। उसके सभी आदेशों को पूरी वैधता प्राप्त होती है तथा वे स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। याचिका में केंद्रीय कानून मंत्रालय, निर्वाचन आयोग, कुमार, संधू, जोशी और निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मनीष गर्ग को पक्षकार बनाया गया है। वकील चांद कुरैशी के जरिए दायर त्रिपाठी की याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीईसी के कार्य सामूहिक निर्णय लेने की सांविधिक जरूरत का उल्लंघन करते हैं।

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