बंगाल में बाबरी मस्जिद का रास्ता साफ! सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण पर रोक लगाने से किया इनकार...सियासी हलचल हुई तेज

तृणमूल कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने मस्जिद निर्माण के लिए खुले तौर पर आर्थिक मदद भी दी है। नवद्वार ब्लॉक के तृणमूल अध्यक्ष ने इस मस्जिद निर्माण में योगदान दिया है। वहीं, तृणमूल नेता सफीउज्जमान शेख ने मस्जिद के लिए करीब 1 लाख 11 हजार रुपये दान किए। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी एक तृणमूल विधायक इस पहल के समर्थन में सामने आ चुके हैं

अपडेटेड Feb 20, 2026 पर 7:23 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद निर्माण पर रोक लगाने से किया इनकार

पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर हलचल मचा हुआ है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद निर्माण के काम पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि देश के किसी भी हिस्से में 'बाबर' नाम पर मस्जिद बनाने पर सामान्य रोक लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है। बता दे कि यह जनहित याचिका एक संगठन की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि बाबर ने भारत पर हमला किया था, और वह हिंदुओं को गुलाम मानता था, इसलिए उसके नाम पर किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण पर रोक लगाई जाए।

हालांकि, जस्टिस विक्रमनाथ की पीठ ने इस याचिका को सुनवाई के स्तर पर ही खारिज कर दिया। अदालत का मानना है कि ऐसी मांग संविधान के दायरे में नहीं आती और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है, क्योंकि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। इस पूरी पहल का नेतृत्व 'जनता उन्नयन पार्टी' के संस्थापक हुमायूं कबीर कर रहे हैं।

इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने मस्जिद निर्माण के लिए खुले तौर पर आर्थिक मदद भी दी है। नवद्वार ब्लॉक के तृणमूल अध्यक्ष ने इस मस्जिद निर्माण में योगदान दिया है। वहीं, तृणमूल नेता सफीउज्जमान शेख ने मस्जिद के लिए करीब 1 लाख 11 हजार रुपये दान किए। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी एक तृणमूल विधायक इस पहल के समर्थन में सामने आ चुके हैं।


उधर, दूसरी तरफ वोटर लिस्ट और SIR को लेकर भी राज्य में विवाद गहराता जा रहा है। कैनिंग ईस्ट इलाके से बड़ी संख्या में लोग पुलिस स्टेशन पहुंचे और मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि हजारों वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं।

इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का सियासी माहौल बेहद गरम हो चुका है। एक तरफ बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर धार्मिक और राजनीतिक बयानबाज़ी तेज है, तो दूसरी तरफ वोटर लिस्ट संशोधन को लेकर तृणमूल और चुनाव आयोग आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ये मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहेंगे, और इसका सीधा असर वोटिंग पैटर्न पर भी पड़ सकता है।

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