Swan Farming Business: ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ नए-नए कारोबार से अपनी आय बढ़ा रहे हैं। इन्हीं में से एक है मछली और हंस पालन का जॉइंट मॉडल। इस तरीके से किसान एक ही तालाब का उपयोग दो अलग-अलग व्यवसायों के लिए कर रहे हैं। बिहार में मछली के साथ अब हंस पालन गांव के युवाओं के लिए मोटी कमाई का जरिया बन रहा है। दरभंगा जिले के जाले प्रखंड के शशि रंजन कुमार ठाकुर इस कारोबार से लाखों रुपये कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हंस का एक अंडा 800 रुपये तक बिका है।
हंस दिनभर तालाब में रहते हैं। उनका मल-मूत्र पानी में प्राकृतिक खाद का काम करता है। इससे मछलियों के लिए आवश्यक पोषक तत्व बढ़ जाते हैं। इससे मछलियों की वृद्धि अच्छी होती है। साथ ही अतिरिक्त चारे पर खर्च भी कम हो जाता है। दूसरी ओर, हंसों से अंडे और मांस की बिक्री के माध्यम से अलग से बंपर कमाई होती है।
इस मॉडल को अपनाकर कई किसान कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि मछली और हंस पालन का यह समन्वित तरीका ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक अच्छा विकल्प बन सकता है। एक ही संसाधन से दोहरी कमाई होने के कारण यह व्यवसाय तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
शशि रंजन को कहां आया आइडिया?
कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से कई प्रवासी मजदूरों को अपने गांव लौटना पड़ा। कई लोग हालात ठीक होने के बाद में काम की तलाश में पिर शहरों में वापस चले गए। वहीं, कुछ लोगों ने एक अलग रास्ता चुना। ऐसी ही एक सफलता की कहानी बिहार के दरभंगा जिले के जाले ब्लॉक के किसान शशि रंजन की है। उन्होंने हंस पालन (swan farming) के जरिए कमाई का एक अच्छा जरिया बनाया है।
कोविड-19 महामारी के कारण देश भर में लोगों की आजीविका पर असर पड़ने से पहले रंजन सूरत में काम करते थे। गांव लौटने के बाद उन्होंने खेती और मछली पालन शुरू किया। बाद में हंस पालन का काम भी शुरू करदिया। शशि ने बताया कि उन्होंने जो काम एक छोटी सी पहल के तौर पर शुरू हुआ था, वह अब उनके लिए कमाई का एक अहम जरिया बन गया है।
800 में बिकता है हंस का एक अंडा
फिलहाल, रंजन अपने फार्म पर कई तरह के हंस पालते हैं। उनके अंडे और चूजे बेचकर लाखों में कमाई करते हैं। उनके अनुसार, बाजार में हंस का एक अंडा 700 से 800 रुपये में बिकता है। खरीदारों का मानना है कि ये अंडे बहुत पौष्टिक होते हैं। दो-तीन लोगों के लिए यह काफी ऊर्जा दे सकते हैं, जिससे इनकी मांग बढ़ रही है।
अंडे बेचने के अलावा, किसान हंस के चूजे बेचकर भी कमाई करता है। आम हंसों का एक जोड़ा लगभग 4,000 से 5,000 रुपये में बिकता है। रंजन फ्लेमिंगो जैसी दिखने वाली एक दुर्लभ प्रजाति भी पालते हैं, जिसे वे बिहार के पूसा इलाके के एक फ़ार्म से लाए थे। उनका कहना है कि ये पक्षी साल में लगभग छह अंडे देते हैं। वे 10 से 12 साल तक जीवित रह सकते हैं।
रंजन के अनुसार, हंस पालन का एक बड़ा फायदा यह है कि इसकी देखभाल का खर्च काफी कम होता है। अगर आस-पास कोई तालाब या छोटा जलाशय हो, तो इन्हें आसानी से पाला जा सकता है। हंस मुख्य रूप से घास, कीड़े-मकोड़े और छोटी मछलियों जैसे प्राकृतिक भोजन पर निर्भर रहते हैं। इससे उनके चारे का खर्च कम हो जाता है।
साथ ही, दूसरे कई पोल्ट्री पक्षियों की तुलना में इनमें बीमारियां कम होती हैं, जिससे स्वास्थ्य देखभाल का खर्च भी कम रहता है। किसान ने कहा, "आज भी हमारे यहां हंस का एक अंडा 700 से 800 रुपये में बिक जाता है। एक अंडे से दो-तीन लोगों को पूरा स्टेमिना मिल जाता है, ऐसा खरीदार कहते हैं।"
एक बार पालिए और कई साल तक करिए कमाई
रंजन का मानना है कि हंस पालन एक लंबे समय का निवेश है, क्योंकि हंसों का एक प्रजनन जोड़ा कई सालों तक अंडे और बच्चे दे सकता है। इससे लगातार कमाई होती रहती है। उनका कहना है कि किसान खेती के साथ-साथ मछली पालन और हंस पालन जैसी सहायक गतिविधियां अपनाकर गांवों में ही अच्छी कमाई कर सकते हैं। रंजन ने कहा कि उन्हें काम की तलाश में कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।