लंबी खींचतान के बाद आखिरकार तमिलनाडु में विजय की पार्टी को बहुमत का आंकड़ा मिल ही गया। कांग्रेस और VCK के साथ लेफ्ट की पार्टियों- CPI और CPI(M) ने विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। हालांकि, वामपंथी दलों में इसमें भी एक पेंच फंसा दिया है। CPI और CPM ने विजय की सरकार को बाहर समर्थन देने का ऐलान किया। इसका मतलब ये हुआ कि लेफ्ट के चुने हुए विधायक मंत्री मंडल में शामिल नहीं होंगे और न ही वे सरकार में को पद लेंगे।
CPU और CPI(M) के संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CPI के राज्य सचिव आर. मुथरासन वीरपांडियन ने कहा कि TVK ने CPI, CPI(M) और VCK से समर्थन मांगा था। इसके बाद दोनों दलों ने अपनी-अपनी पार्टी बैठकों में चर्चा कर लोकतांत्रिक तरीके से फैसला लिया।
वीरापांडियन ने कहा, “लोकतंत्र में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। तमिलनाडु की जनता ने टीवीके को समर्थन देकर अपना जनादेश दिया है। हमने भी लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लिया है।”
उन्होंने आगे कहा, "हम कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे। हम बाहर से समर्थन देंगे। TVK के साथ कोई गठबंधन नहीं हुआ है। हमने केवल समर्थन दिया है। कुछ खास मुद्दों पर हम DMK के साथ खड़े रहेंगे।"
इस समर्थन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। अब तक बहुमत के आंकड़े से दूर नजर आ रही टीवीके को वामदलों का समर्थन मिलने से सरकार बनाने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही समय पहले VCK ने टीवीके की राजनीतिक रणनीति और गठबंधन प्रबंधन पर सवाल उठाए थे। ऐसे में वामदलों का समर्थन तमिलनाडु की विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण सरकार गठन पर अनिश्चितता बनी हुई थी। अब CPI और CPI(M) के समर्थन के बाद विजय खेमे में उत्साह बढ़ गया है।
इसी के साथ अब से कुछ देर में विजय राज्यपाल से मिलने जाने वाले हैं, जहां वे सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।