Tamil Nadu Elections: सीएम स्टालिन के मजबूत गढ़ में BJP और विजय का बड़ा दांव, चेन्नई के इस विधानसभा पर है सबकी नजर

Thousand Lights Assembly Seat : चेन्नई का थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र, कभी मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का मजबूत गढ़ माना जाता था। ये विधानसभा अब 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गया है। यह इलाका लंबे समय से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) का मजबूत आधार रहा है, लेकिन इस बार यहां मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प और कड़ा हो गया है

अपडेटेड Apr 11, 2026 पर 3:17 PM
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Tamil Nadu polls 2026: तमिलनाडु चुनाव को देखते हुए तमाम पार्टियां अपनी जीत के लिए पूरी ताकत लगा रही है।

तमिलनाडु चुनाव को देखते हुए तमाम पार्टियां अपनी जीत के लिए पूरी ताकत लगा रही है। तमिलनाडु की राजनीति में इस बार सिर्फ चुनाव काफी दिलस्प होने वाला है। दशकों से दो ध्रुवों (Bipolar) के बीच झूलने वाली तमिलनाडु की राजनीति इस बार एक मल्टीपोलर मोड़ पर खड़ी है। सूबे की राजनीति में अब चर्चा 'थलपति' विजय और उनकी नई पार्टी TVK की हो रही है। वहीं चुनावी संग्राम के बीच राज्य की एक ऐसी विधानसभा है जहां सबकी नजरें सबसे ज्यादा है।

DMK को मिलेगी चुनौती?

चेन्नई का थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र, कभी मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का मजबूत गढ़ माना जाता था। ये विधानसभा अब 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गया है। यह इलाका लंबे समय से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) का मजबूत आधार रहा है, लेकिन इस बार यहां मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प और कड़ा हो गया है। राजनीतिक पार्टियां इस सीट पर पुराने वोटिंग पैटर्न को बदलने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं, जिससे यहां बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। अगर इतिहास पर नजर डालें, तो 1971 से अब तक इस क्षेत्र ने आठ बार डीएमके के उम्मीदवारों को जीत दिलाई है, जो इस इलाके को द्रविड़ राजनीति का मजबूत गढ़ साबित करता है।


उम्मीदवारों के नामों का ऐलान होना बाकी

थाउज़ेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। अभी उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी नहीं हुई है, लेकिन पार्टियों के संकेतों से तस्वीर काफी हद तक साफ हो रही है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) इस सीट से अपने मौजूदा विधायक एझिलन नागनाथन को एक बार फिर चुनाव मैदान में उतार सकती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) किसी बड़े और लोकप्रिय शहरी चेहरे को मौका दे सकती है। भाजपा से खुशबू सुंदर 2021 का चुनाव भी लड़ चुकी हैं।

इसके अलावा, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) भी इस सीट पर मजबूत वापसी की कोशिश में है और शहरी वोटर्स को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत और संगठित उम्मीदवार उतार सकती है। नाम तमिलर काची (एनटीके) ने आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए निर्देशक कलंजियम को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। वहीं, मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) भी चेन्नई के शहरी मुद्दों को केंद्र में रखकर एक बार फिर चुनावी मैदान में उतर सकती है। थाउज़ेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र में आमतौर पर कई पार्टियों के बीच मुकाबला होता है। ऐसे में वोटों का बंटना यहां जीत-हार तय करने में बहुत अहम भूमिका निभाता है।

DMK के मजबूत गढ़

थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र के पिछले चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो यह सीट लंबे समय से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के पक्ष में जाती रही है। इसी वजह से इसे पार्टी का मजबूत और पारंपरिक गढ़ माना जाता है। साल 1989 से 2006 के बीच एम.के. स्टालिन ने इस क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व किया। बाद में उन्होंने कोलाथुर विधानसभा सीट का रुख किया। हालांकि यह सीट ज्यादातर डीएमके के साथ रही है, लेकिन बीच-बीच में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने भी यहां जीत दर्ज की है। इससे साफ होता है कि इस क्षेत्र में अंदरूनी तौर पर कड़ा मुकाबला होता रहता है और चुनाव हमेशा दिलचस्प बने रहते हैं।

कैसा रहा है पिछला तीन चुनाव

  • 2021 विधानसभा चुनाव में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के एझिलन नागनाथन ने जीत हासिल की। उन्हें 71,867 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की खुशबू सुंदर को 39,405 वोट मिले। इस चुनाव में जीत का अंतर 32,462 वोट रहा।
  • 2016 विधानसभा चुनाव में डीएमके के कु. का. सेल्वम ने 61,726 वोट लेकर जीत दर्ज की। उनके मुकाबले में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की बी. वलरमथी को 52,897 वोट मिले। इस बार जीत का अंतर 8,829 वोट था।
  • 2011 विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके की बी. वलरमथी ने 67,522 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने डीएमके के हसन मोहम्मद जिन्ना को हराया, जिन्हें 59,930 वोट मिले। इस चुनाव में जीत का अंतर 7,592 वोट रहा। खास बात यह है कि 2011 का चुनाव उन गिने-चुने मौकों में से एक था, जब एआईएडीएमके ने डीएमके के मजबूत गढ़ में जीत हासिल की थी।

क्या हैं यहां के अहम मुद्दे

1. शहरी ढांचा और ट्रैफिक की समस्या

इस इलाके में लंबे समय से ट्रैफिक जाम और सड़कों पर रुकावट बड़ी परेशानी बनी हुई है। रोज़मर्रा की आवाजाही में लोगों को काफी दिक्कत होती है। इसलिए मतदाता अब बेहतर सड़क व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण और आसान परिवहन सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

2. जरूरी नागरिक सुविधाएं

पानी की सही सप्लाई, कचरे का सही निपटान और जल निकासी की समस्या भी यहां के लोगों के लिए बड़ी चिंता है। हर चुनाव की तरह इस बार भी ये मुद्दे लोगों की प्राथमिकता में शामिल हैं।

3. अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों की भागीदारी

इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग अपार्टमेंट और ऊंची इमारतों में रहते हैं, लेकिन उनकी वोटिंग में भागीदारी कम देखी गई है। इसे ध्यान में रखते हुए राजनीतिक पार्टियां अब इन इलाकों में खास अभियान चला रही हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग वोट डालने के लिए आगे आएं।

4. अल्पसंख्यक और कल्याणकारी राजनीति

इस क्षेत्र में कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंच बनाना चुनाव के बड़े मुद्दों में शामिल हैं। राजनीतिक पार्टियां इन वर्गों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बना रही हैं।

5. सत्ता विरोधी माहौल बनाम डीएमके का मजबूत आधार

एक तरफ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को इस क्षेत्र में अपने पुराने मजबूत आधार का फायदा मिल रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल शहर में मौजूद असंतोष को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि यहां मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

इस बार काफी दिलचस्प है लड़ाई

थाउज़ेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र अब सिर्फ एक पुरानी और ऐतिहासिक सीट नहीं रह गया है, बल्कि यह शहरी तमिलनाडु की राजनीति के लिए एक तरह की बड़ी परीक्षा बन चुका है। यहां बड़े और चर्चित उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं, साथ ही मतदाताओं का रुझान भी धीरे-धीरे बदल रहा है। इस सीट की अपनी एक खास पहचान और राजनीतिक महत्व है। ऐसे में 2026 के चुनाव के नतीजे सिर्फ चेन्नई ही नहीं, बल्कि पूरे तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे सकते हैं।

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