TMC Vs TMC: चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार (17 सितंबर) को एक अंतरिम आदेश में पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न (फूल और घास) के इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी। निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को शुक्रवार यानी 18 सितंबर की सुबह तक अपनी पसंद के तीन नाम और चुनाव चिह्न सौंपने का निर्देश दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि कल तृणमूल कांग्रेस के दोनों बागी खेमों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह मिल सकता है। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों से कहा है कि वे पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव के लिए आयोग द्वारा अधिसूचित कोई भी चुनाव चिह्न और पार्टी का कोई दूसरा नाम चुनें।
सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार दोपहर 3 बजे ऋतब्रत बनर्जी सहयोगी नेताओं के साथ चुनाव आयोग से मुलाकात करेंगे। इसके बाद शाम 4 बजे कल्याण बनर्जी सहयोगियों के साथ निर्वाचन आयोग से मिलेंगे। माना जा रहा है इसके बाद चुनाव आयोग शाम तक कोई अंतरिम आदेश जारी कर सकता है।
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से की मुलाकात
निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर पार्टी के ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुटों की अलग-अलग सुनवाई की। इसमें ममता गुट ने किसी भी अंतरिम आदेश का विरोध किया। जबकि ऋतब्रत गुट ने पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्न के संबंध में जल्द निर्णय लेने की मांग की। बागी गुट में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अकरुल ज़मान, अरूप रॉय और एक वकील शामिल हैं। उन्होंने आयोग के सभी सदस्यों से मुलाक़ात की तथा अपनी बात रखी।
सुनवाई के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, "हमने अपना पक्ष रखा और हमसे पूछे गए सवालों के जवाब दिए।" उन्होंने कहा कि चुनाव चिह्न का मुद्दा इसलिए अहम हो गया है क्योंकि नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव होने वाले हैं और दोनों गुटों की ओर से उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किये हैं। इसके बाद, ममता बनर्जी गुट के सदस्य डेरेक ओब्रायन, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने आयोग के सदस्यों से मुलाकात की।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी ने किसी भी अंतरिम आदेश का विरोध किया है। ममता गुट का कहना है कि ऐसे निर्देश का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा, "हमने कहा है कि कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए। कोई भी आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए।" तृणमूल सांसद ने बागी नेताओं के 6 और 19 मई को पार्टी की बैठकों में शामिल होने और 3 जून को लोकसभा अध्यक्ष से मिलने का जिक्र किया, जब उन्होंने दावा किया था कि वे तृणमूल का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, "उस तारीख तक आपने पार्टी के अस्तित्व को माना था। अचानक 22 जून को आपने कह दिया कि तृणमूल कांग्रेस है ही नहीं। आप ये दोनों बात कैसे कह सकते हैं।" ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया है कि आगामी उपचुनावों को देखते हुए वह जल्द निर्णय ले। उन्होंने कहा, "हमने आयोग से जल्द फैसला करने का अनुरोध किया है क्योंकि उपचुनाव नजदीक हैं। हम निर्वाचन आयोग का सम्मान करते हैं और उस पर विश्वास करते हैं।"