Marco Rubio India visit: पीएम मोदी से मिलने के लिए बेकरार हैं डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने 'व्हाइट हाउस' आने का दिया न्योता

Marco Rubio India visit: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि रूबियो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पीएम मोदी को नज़दीकी भविष्य में 'व्हाइट हाउस' आने का न्योता दिया है

अपडेटेड May 23, 2026 पर 5:29 PM
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Marco Rubio India visit: प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की

Marco Rubio India visit: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शनिवार (23 मई) शाम को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'व्हाइट हाउस' आने का न्योता दिया गया है। गोर ने यह घोषणा नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के कुछ ही देर बाद की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को नजदीकी भविष्य में व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया है। मार्को रूबियो भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के तहत शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे।

इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना है, जिनमें पिछले साल के मध्य से ही तनाव बना हुआ है। रूबियो विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। वह नई दिल्ली में ‘क्वाड’ देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। रूबियो अपनी भारत यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की। शनिवार सुबह पूर्वी भारत के इस महानगर पहुंचने के बाद उन्होंने सेंट टेरेसा मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय मदर हाउस का दौरा किया।

पीएम मोदी ने क्या कहा?


रूबियो कोलकाता से दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित थी। पीएम मोदी ने X पर अमेरिकी विदेश मंत्री से मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "मार्को रूबियो का स्वागत करके प्रसन्नता हुई। हमने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में सतत प्रगति पर चर्चा की।" पीएम मोंदी ने आगे कहा, "हमने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।" उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका वैश्विक हित के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

वहीं, इस मुलाकात के बाद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने X पर लिखा, "विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया है।" PM मोदी-रूबियो वार्ता पर गोर ने कहा, "सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अमेरिका-भारत सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर हमारी सार्थक चर्चा हुई।"

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री रूबियो का स्वागत करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक दूरदर्शी एजेंडा पेश किया। उन्होंने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मजबूत अमेरिका-भारत साझेदारी के रणनीतिक दृष्टिकोण को साकार करने पर वाशिंगटन द्वारा ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया।

आगरा और जयपुर का करेंगे दौरा

अमेरिकी विदेश मंत्री सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे। फिर मंगलवार सुबह क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए दिल्ली लौटेंगे। मामले के बारे में जानकारी रखने वालों के अनुसार, जयशंकर और रूबियो के बीच होने वाली वार्ता में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी और दोनों देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान के क्षेत्रों में भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होने की संभावना है।

दोनों पक्षों द्वारा पश्चिम एशिया संकट और इसके ऊर्जा आपूर्ति सहित आर्थिक प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किए जाने की उम्मीद है। रूबियो की भारत यात्रा विदेश सचिव विक्रम मिसरी की वाशिंगटन डीसी की तीन दिवसीय यात्रा के पांच सप्ताह से अधिक समय बाद हो रही है। इसका उद्देश्य अनिश्चितता और तनाव के दौर के बाद संबंधों को स्थिर करना था।

दोनों देशों के संबंधों में उस समय तनाव देखने को मिला था जब अमेरिका ने भारत पर शुल्क लगाए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को कम करने में अपनी भूमिका को लेकर विवादित दावे किए थे। इसके बाद, अगले कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच सैन्य संघर्ष को सुलझाया और लाखों लोगों की जान बचाई, क्योंकि स्थिति पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रही थी।

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भारत दृढ़ता से कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के परिणाम के आधार पर संघर्ष समाप्त हुआ था। इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। अमेरिका की नई आव्रजन नीति और H1 B वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले से भी दोनों देशों के संबंधों में खटास पैदा हुई। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने के प्रयास किए हैं। दोनों देशों ने जल्द ही पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का संकल्प लिया है।

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