ट्विशा शर्मा मौत मामला: भोपाल कोर्ट में हुआ भारी ड्रामा, अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच हाथापाई की नौबत आई!

Twisha Death Case: ट्विशा शर्मा के परिवार ने पूर्व जज और उनके बेटे पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद आज CBI ने दोनों को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) की कोर्ट में पेश किया था। CBI ने उनकी रिमांड आगे बढ़ाने की मांग नहीं की, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया

अपडेटेड Jun 02, 2026 पर 8:52 PM
Twisha Sharma Death: भोपाल कोर्ट में हुआ भारी ड्रामा, अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच हाथापाई की नौबत आई!

भोपाल की एक अदालत में आज 'ट्विशा शर्मा मौत मामले' की सुनवाई के दौरान भारी हंगामा, तीखी बहस और चौंकाने वाले आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों को 16 जून तक भोपाल सेंट्रल जेल में रखा जाएगा। सुरक्षा कारणों और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें बाकी कैदियों से अलग बैरक में रखा जाएगा।

ट्विशा शर्मा के परिवार ने पूर्व जज और उनके बेटे पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद आज CBI ने दोनों को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) की कोर्ट में पेश किया था। CBI ने उनकी रिमांड आगे बढ़ाने की मांग नहीं की, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।

भरी अदालत में पूर्व जज ने खुद लड़ा अपना केस


NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, 63 साल की पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने कोर्ट रूम में खुद खड़े होकर अपने केस की पैरवी की। कोर्ट में मौजूद लोगों के मुताबिक, वह काफी गुस्से में थीं और बार-बार अपनी आवाज ऊंची कर रही थीं। उन्होंने विपक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जबलपुर हाई कोर्ट परिसर के अंदर उनके बेटे समर्थ के साथ मारपीट की थी।

इस पर वकील अनुराग श्रीवास्तव ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा, "अगर ऐसी कोई घटना सच में हुई है, तो कोर्ट के CCTV फुटेज की जांच होनी चाहिए। पूरे कोर्ट परिसर में कैमरे लगे हैं, सच सामने आ जाएगा।"

30,000 का इनामी भगोड़ा जज के केबिन में कैसे छुपा?

बहस के दौरान वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कोर्ट के सामने एक और बड़ा और विस्फोटक सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि समर्थ सिंह, जो पुलिस से भाग रहा था और जिस पर 30,000 रुपये का इनाम था, उसे जबलपुर के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के चेंबर (केबिन) के अंदर छिपने की जगह कैसे मिली? उन्होंने कहा, "एक इनामी भगोड़े को वहां शरण कैसे मिल सकती है? इस बात की अलग से स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।"

जवाब में समर्थ सिंह के वकीलों ने दलील दी कि अगर किसी नागरिक की जान को खतरा हो, तो उसे अपनी सुरक्षा के लिए शरण लेने का पूरा अधिकार है। कोर्ट रूम का माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया था कि दोनों पक्षों के बीच बात हाथापाई तक पहुंचने वाली थी।

'मीडिया ट्रायल' और जांच पर उठाए सवाल

पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने इस मामले को लेकर चल रहे "मीडिया ट्रायल" पर भी जमकर गुस्सा निकाला। उन्होंने कोर्ट से कहा, "हम जहां भी जाते हैं, मीडिया हमारे पीछे पड़ जाता है। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए, हमारी जान को खतरा है।"

इसके अलावा, उन्होंने सीबीआई द्वारा घटना स्थल के री-कंस्ट्रक्शन (सीन को दोबारा दोहराने की प्रक्रिया) के तरीके पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि जांच अधिकारी उन्हें सीधे उनके घर ले जाने के बजाय कुछ दूर पहले ही गाड़ी से क्यों उतार रहे थे?

मौत के बाद सामने आए विवादित CCTV फुटेज पर सफाई देते हुए पूर्व जज ने कहा कि उनका इस वीडियो से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें नहीं पता कि इस वीडियो को किसने लीक किया है। पूरे हंगामे के बीच, सीबीआई ने शांति बनाए रखी और कोर्ट को बताया कि वे फिलहाल सिर्फ न्यायिक हिरासत (जेल भेजने) की मांग कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर भविष्य में दोबारा पुलिस रिमांड मांग सकते हैं।

महीनों से टॉयलेट में बंद, खाने को सिर्फ कच्चे चावल, प्याज और मिर्च! ससुराल वालों पर महिला को पीटने का आरोप, देहरादून का मामला

 

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।