महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव के बाद एक बार फिर वहां रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मेयर को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। इसी बीच पास के कल्याण डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में जबरदस्त राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। KDMC में चल रहा यह ड्रामा कुछ हद तक गुवाहाटी की उस घटना की याद दिलाता है, जिसके बाद एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को तोड़ दिया था।
बताया जा रहा है कि इस इलाके से उद्धव ठाकरे गुट के 11 कॉर्पोरेटर अचानक संपर्क से बाहर यानी अनरीचेबल हो गए हैं। इससे राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है और कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के चुनाव में शिंदे सेना को 122 में से 53 सीटें मिली हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की है। KDMC में सरकार बनाने के लिए 62 सीटों का बहुमत जरूरी है। हालांकि राज्य स्तर पर शिंदे गुट और BJP एक साथ गठबंधन में हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि कल्याण-डोंबिवली में दोनों ही दल अकेले दम पर सत्ता हासिल करना चाहते हैं। यह इलाका एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है, इसलिए यहां मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
इस स्थिति में उद्धव ठाकरे गुट के 11 कॉर्पोरेटर और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के 5 कॉर्पोरेटर बेहद अहम हो जाते हैं। अगर शिंदे गुट या BJP में से कोई भी अपना मेयर बनाना चाहता है, तो उसे ठाकरे गुट और अन्य दलों के कुल 16 कॉर्पोरेटरों का समर्थन हासिल करना होगा।
उद्धव ठाकरे गुट के सभी 11 और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के 5 कॉर्पोरेटर इस समय संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। खबर है कि सभी को अलग-अलग अज्ञात जगहों पर रखा गया है। पार्टी में टूट-फूट से बचने के लिए एहतियात के तौर पर, ठाकरे गुट और MNS ने अपने-अपने कॉर्पोरेटरों को अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। न्यूज18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना शिंदे गुट छह से सात ऐसे नए कॉर्पोरेटरों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें उनकी पार्टी ने टिकट नहीं दिया था, लेकिन वे शिवसेना UBT और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के समर्थन से चुनाव जीतकर आए हैं।
वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी MNS या UBT के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश में जुटी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिंदे गुट और MNS के बीच हाथ मिलाने की पूरी संभावना बनी हुई है।
2022 में गुवाहाटी में क्या हुआ था?
साल 2022 के बीच में एकनाथ शिंदे ने उस समय बड़ी बगावत कर दी थी, जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एकजुट शिवसेना सत्ता में थी। शिवसेना के कई विधायक शिंदे के साथ खड़े हो गए थे। यह विवाद महा विकास अघाड़ी सरकार की कार्यशैली और दिशा को लेकर पार्टी के अंदर मतभेद बढ़ने के बाद सामने आया। उस समय महा विकास अघाड़ी की सरकार थी, जिसमें शिवसेना के साथ कांग्रेस और एनसीपी भी शामिल थीं।
एकनाथ शिंदे अपने साथ कई विधायकों को लेकर महाराष्ट्र से बाहर चले गए। पहले उन्हें सूरत के एक होटल में ठहराया गया और बाद में सभी को असम के गुवाहाटी ले जाया गया। वहां सभी विधायक एक साथ रहे, ताकि किसी तरह की टूट-फूट न हो और उनकी संख्या बनी रहे। गुवाहाटी से ही शिंदे ने दावा किया कि करीब 40 शिवसेना विधायक उनके समर्थन में हैं। इसी बगावत के चलते उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थन से एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में नई सरकार बनाई।