BMC नतीजे के बाद शिंदे सेना को सताने लगा टूटने का डर! रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की ओर उद्धव ठाकरे का इशारा

Uddhav Thackeray : पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफ कहा कि सीटें कम होने के बावजूद उनकी पार्टी अब भी मुंबई में अपना मेयर देखना चाहती है। उन्होंने कहा, “हमारी इच्छा है कि मुंबई में हमारा मेयर चुना जाए। आज भी हम यही चाहते हैं, लेकिन फिलहाल हमारे पास ज़रूरी संख्या नहीं है

अपडेटेड Jan 17, 2026 पर 8:10 PM
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उद्धव ठाकरे ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे बीजेपी से डरे हुए हैं।

Uddhav Thackeray : उद्धव ठाकरे ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे बीजेपी से डरे हुए हैं। उनका कहना है कि इसी डर के चलते शनिवार को डिप्टी सीएम शिंदे ने मुंबई में नए चुने गए शिवसेना(UBT) के पार्षदों को एक फाइव-स्टार होटल में ठहराया। BMC पर महायुति का नियंत्रण जाने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उद्धव ठाकरे ने इशारा किया कि देश की सबसे अमीर नगर निकाय पर कब्जे की खींचतान के बीच शिंदे गुट में फूट पड़ सकती है।

शिवसेना के टूटने का डर

उद्धव ठाकरे ने कहा, “एकनाथ शिंदे बीजेपी से डरे हुए हैं, इसलिए उन्होंने अपने पार्षदों को फाइव-स्टार होटल में रखा है। उन्हें पता है कि अगर वे एक बार बंटे हैं, तो फिर बंट सकते हैं।” उन्होंने 2022 की उस घटना का भी जिक्र किया, जब 40 विधायकों की बगावत के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। शिंदे के नेतृत्व में हुई उस बगावत से उद्धव–कांग्रेस–एनसीपी सरकार गिर गई थी और बाद में शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।


सूत्रों के हवाले से इंडिया टुडे ने बताया कि सभी 29 शिवसेना पार्षदों को Taj Lands End पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की हॉर्स-ट्रेडिंग या खरीद-फरोख्त की कोशिश को रोका जा सके।

BMC की बड़ी सियासी लड़ाई

शुक्रवार को बीजेपी और शिवसेनाके गठबंधन ने महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में ज़बरदस्त जीत दर्ज की। राज्य के 29 में से 25 नगर निकायों में इस गठबंधन ने बाज़ी मारी। सबसे बड़ी जीत BMC में रही, जहां बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।हालांकि BMC में बहुमत का आंकड़ा 114 सीटें है, जिसे पार करने के लिए बीजेपी को शिंदे गुट की शिवसेना के समर्थन की ज़रूरत पड़ी। महायुति की इस जीत के साथ ही BMC पर ठाकरे परिवार का लगभग 30 साल पुराना दबदबा खत्म हो गया।

दूसरी ओर, करीब 20 साल बाद साथ आए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरेकी जोड़ी पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ी। शिवसेना (UBT) और MNS के गठबंधन ने कुल 71 सीटें (65 + 6) जीतीं और मुंबई के मराठी बहुल इलाकों में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखी।

 उद्धव ठाकरे ने कही ये बात

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफ कहा कि सीटें कम होने के बावजूद उनकी पार्टी अब भी मुंबई में अपना मेयर देखना चाहती है। उन्होंने कहा, “हमारी इच्छा है कि मुंबई में हमारा मेयर चुना जाए। आज भी हम यही चाहते हैं, लेकिन फिलहाल हमारे पास ज़रूरी संख्या नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अपनी पार्टी द्वारा जीती गई 65 सीटों का ज़िक्र करते हुए उद्धव ने कहा कि उनका गुट मुंबई की राजनीति में अब भी मजबूत है।

उद्धव ठाकरे ने कहा, “वे शिवसेना(UBT) को कागज़ पर खत्म कर सकते हैं, लेकिन ज़मीन पर नहीं। भारतीय जनता पार्टी सिर्फ कागज़ पर दिखती है, जमीन पर नहीं।” उनके मुताबिक, भले ही नतीजे मनचाहे न हों, लेकिन मुंबई में उनकी पार्टी की मौजूदगी और पकड़ अब भी बनी हुई है। उन्होंने महायुति पर आरोप लगाया कि जीत हासिल करने के लिए सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल किया गया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि दलबदलुओं को जिताने के लिए सत्ता, पैसा और धमकियों का सहारा लिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके पार्टी कार्यकर्ताओं की वफ़ादारी अब भी मजबूत है।

लगाया ये बड़ा आरोप

उद्धव ठाकरे ने कहा, “मेरी और राज ठाकरेकी संयुक्त रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी थी, जबकि महायुति की रैलियों में सिर्फ़ खाली कुर्सियां दिखीं। मुझे हैरानी होती है कि क्या उन कुर्सियों ने उनके लिए वोट दिया, क्योंकि उन्हें वोट मिले और हमारी भीड़ वोटों में नहीं बदल पाई।” अपनी बात खत्म करते हुए शिवसेना(UBT) के वरिष्ठ नेता ने दोहराया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।

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