गलती NTA करे, सजा छात्र भुगतें! 45 दिन बाद नींद खुली तो रद्द किए UGC-NET के 3 पेपर, राहुल गांधी बोले- 'यह एक्सट्रैक्शन मशीन है'
UGC NET 2026 June Paper Cancel: 16 अगस्त 2026 को जारी अपने नोटिस में NTA ने जिस बेबाकी से अपनी कमियों को कबूला है, वह व्यवस्था पर तरस खाने पर मजबूर करता है। तीन विषयों के पेपरों में धांधली और गलतियों की शिकायतों के बाद बनी जांच कमेटी ने जो सच सामने रखा है, वो बेहद हैरान करने वाला है
NTA ने अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के पेपर रद्द कर दिए गए हैं और अभ्यर्थियों को सितंबर में दोबारा परीक्षा देने का फरमान सुना दिया है
NTA UGC NET June 2026: UGC-NET जून 2026 के नतीजों का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक ऐसा झटका दिया है, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 22 से 30 जून के बीच हुई परीक्षा के करीब 45 दिन बाद नींद से जागी एजेंसी ने माना कि उससे भारी गलतियां हुई हैं। नतीजा ये हुआ कि अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के पेपर रद्द कर दिए गए हैं और अभ्यर्थियों को सितंबर में दोबारा परीक्षा देने का फरमान सुना दिया गया है।
सालों की मेहनत, तैयारी का तनाव, जेब का खर्च और प्रोफेसर बनने का सपना... सब कुछ NTA के एक 'पब्लिक नोटिस' की बलि चढ़ गया। आइए समझते हैं कि कैसे एक राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी अभ्यर्थियों के लिए 'सिरदर्द' बनती जा रही है और इस फैसले के पीछे का पूरा सच क्या है।
NTA की नाकामी का कबूलनामा: विचारकों के नाम गलत, सवाल हूबहू रिपीट!
16 अगस्त 2026 को जारी अपने नोटिस में NTA ने जिस बेबाकी से अपनी कमियों को कबूला है, वह व्यवस्था पर तरस खाने पर मजबूर करता है। तीन विषयों के पेपरों में धांधली और गलतियों की शिकायतों के बाद बनी जांच कमेटी ने जो सच सामने रखा, वह बेहद शर्मनाक है:
महान विचारकों के नाम में स्पेलिंग मिस्टेक: जिन समाजशास्त्रियों और विद्वानों को पढ़कर छात्र देश का भविष्य गढ़ने की तैयारी करते हैं, NTA के पेपर सेटर उनके नाम की सही स्पेलिंग तक नहीं छाप पाए।
किताबों के नाम में त्रुटि: देश की सबसे बड़ी परीक्षा के प्रश्न पत्र में प्रसिद्ध पुस्तकों के टाइटल इस कदर गलत छापे गए कि उनका पूरा का पूरा अर्थ ही बदल गया।
कट-कॉपी-पेस्ट का खेल: पिछले सालों के प्रश्न पत्रों से बिना कोई दिमाग लगाए, बड़ी संख्या में सवाल सीधे उठाकर फिर से चेप दिए गए। छात्रों और कोचिंग संस्थानों का मानना है कि करीब 65 से 70 सवाल पिछले किसी एक एग्जाम से ही उठा कर कॉपी पेस्ट कर दीये गए।
व्याकरण और भाषा का कबाड़ा: प्रश्न बनाने वालों को न जेंडर का ख्याल रहा, न नंबर एग्रीमेंट का और न ही ग्रामर की समझ दिखाई दी।
NTA का तर्क है कि गलतियों का दायरा इतना बड़ा था कि केवल विवादित सवालों को 'ड्रॉप' करके रिजल्ट जारी करना संभव नहीं था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस एजेंसी के पास करोड़ों का बजट है, क्या उसके पास एक त्रुटिहीन प्रश्न पत्र तैयार करने लायक योग्य प्रोफेसर और एक्सपर्ट भी नहीं बचे हैं?
राहुल गांधी का करारा प्रहार: 'यह एजुकेशन सिस्टम नहीं, एक्सट्रैक्शन मशीन है'
परीक्षा रद्द होने की खबर आते ही सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार और NTA के ढर्रे की बखिया उधेड़ते हुए सीधा हमला बोला।
राहुल गांधी ने अभ्यर्थियों के दर्द को आवाज देते हुए लिखा, '22 से 30 जून के बीच परीक्षा हुई और दो महीने बाद गलत पेपर सेट करने और पुराने सवाल दोहराने के कारण NTA ने इन्हें रद्द कर दिया। सालों तैयारी करने वाले, फॉर्म की फीस भरने वाले और दूर-दराज के सेंटर्स तक सफर करने वाले छात्र अब सितंबर में फिर परीक्षा देंगे। गलती NTA करे, लेकिन उसकी सजा देश का मासूम छात्र भुगते।'
'यह अब शिक्षा प्रणाली बची ही नहीं है। यह एक 'एक्सट्रैक्शन मशीन' बन चुकी है, जो आपका पैसा, आपके साल, आपका मानसिक स्वास्थ्य और आपका आत्मविश्वास सब निचोड़ लेती है और बदले में कुछ नहीं देती... एक नौकरी भी नहीं।'
राहुल गांधी ने यह तीखा सवाल भी किया कि क्या सोशियोलॉजी और अन्य विषयों के पेपर परीक्षा से पहले ही लीक हो चुके थे? उन्होंने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी कोई अपनी जवाबदेही तय नहीं करेगा। पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को पहला कदम बताते हुए उन्होंने NTA के पूरे शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करने की मांग की।
Modi ji, look at what your NTA has just done.
UGC-NET exams for Sociology, English and Commerce were held between 22 and 30 June. Nearly two months later, NTA has cancelled all three because it set faulty papers and repeated old questions. Thousands of candidates who prepared… https://t.co/TUMhhMhjvL — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 17, 2026
री-एग्जाम का नया शेड्यूल: तारीखें नई, लेकिन तकलीफ वही पुरानी
NTA के आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, अब इन तीन विषयों के अभ्यर्थियों को सितंबर में दोबारा परीक्षा केंद्र के चक्कर काटने होंगे:
English: 9 सितंबर 2026- शिफ्ट 1 (सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक)
Commerce: 9 सितंबर 2026- शिफ्ट 2 (दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक)
Sociology: 10 सितंबर 2026- शिफ्ट 1 (सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक)
एजेंसी ने बड़ी दरियादिली दिखाते हुए यह ऐलान किया है कि दोबारा परीक्षा देने के लिए कोई एक्स्ट्रा फीस नहीं ली जाएगी। साथ ही बाकी 84 विषयों का रिजल्ट और JRF आवंटन समय पर करने का दावा किया गया है।
इस 'नाकाम तंत्र' की लाचारी का हिसाब कौन देगा?
NEET हो या UGC-NET, बार-बार पेपरों का रद्द होना, सवालों में गलतियां निकलना या लीक की खबरें आना अब कोई अचानक हुआ कोई हादसा नहीं, बल्कि एक तय पैटर्न बन चुका है। हर बार एक कमेटी बना दी जाती है, एक नया नोटिफिकेशन चिपका दिया जाता है, और लाखों युवाओं को सितंबर या किसी अगली तारीख के चक्रव्यूह में धकेल दिया जाता है।
कुल मिलाकर छात्रों और पैरेंट्स का अब असल सवाल ये है कि जिन लापरवाह अफसरों और पेपर सेटर्स से बार-बार हो रही गलतियों की वजह से देश का युवा मानसिक अवसाद में जा रहा है, क्या उन पर कभी कोई कार्रवाई होगी? या फिर NTA हर बार एक 'पब्लिक नोटिस' जारी करके अपनी जिम्मेदारियों से यूं ही हाथ झाड़ता रहेगा?