उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक खौफनाक वारदात हुई, जहां 30 साल के एक शख्स ने अपने घर की छत पर अपनी मां और पत्नी को लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला, ईंटों से उनके सिर कुचल दिए और उनकी खोपड़ियों से मांस नोच डाला। पीड़ितों की चीख पुकार सुनकर पूरा गांव जमा हो गया, लेकिन ऐसा नरसंहार देख कर, दहशत में लोग कुछ नहीं कर पाए। अहिराउली पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले परसा गांव में सोमवार सुबह घटी घटना ने पुलिस और गांव वालों दोनों को स्तब्ध कर दिया।
चीख-पुकार सुनकर जब स्थानीय लोग घर की ओर दौड़े, तो देखने वालों के अनुसार सिकंदर ने उन लोगों के ऊपर ही मांस के टुकड़े फेंकना शुरू कर दिया, जिससे दहशत और अफरा-तफरी मच गई। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी 30 साल का सिकंदर गुप्ता मुंबई में मजदूरी करता था और लगभग एक महीने पहले गांव लौटा था। ग्रामीणों का आरोप है कि सिकंदर शराब और गांजे का आदी था और अक्सर अपनी पत्नी और मां को मारता-पीटता था, और उन्हें जान से मारने की धमकी भी देता था।
पुलिस ने बताया कि सिकंदर ने पहले अपने घर की छत पर अपनी पत्नी 28 साल की प्रियंका और 60 साल की मां रूना देवी पर लाठियों से हमला किया। फिर उसने एक सीमेंट की ईंट उठाई और बार-बार उनके सिर पर वार किया, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। आरोप है कि उसने शवों को क्षत-विक्षत कर दिया, उनकी खोपड़ियों से मांस निकाल लिया और पूरे गांव के सामने उसे खा गया।
कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक केशव मिश्रा ने कहा, “डबल मर्डर का मामला दर्ज किया गया है और पुलिस जांच के तहत आरोपियों की मानसिक स्थिति की भी जांच कर रही है।”
TOI के मुताबिक, गुजरात के नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) से पढ़े स्वतंत्र अपराधशास्त्री अशोक श्रीवास्तव राज्य पुलिस और CBI की मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि कुशीनगर जैसी नरभक्षण घटनाएं गंभीर मानसिक बीमारी दिखाती हैं। यह वर्चस्व की चाह, गहरा आघात और कभी-कभी दिमागी कारणों से होती है।
श्रीवास्तव ने बताया, "ऐसे मामलों में नरभक्षण पहले से सोचा जाता है। यह पीड़ित पर पूरी ताकत दिखाने की चाह से होता है। अपराधी को लगता है कि पीड़ित हमेशा उसके पास रहेगा, कभी भाग नहीं सकेगा।"
उन्होंने कहा कि यह इंसान को सबसे नीचा दिखाने का तरीका है। उन्होंने बताया, "शरीर खा लेना पीड़ित को वस्तु बना देता है। यह ताकत और नियंत्रण का सबसे बड़ा रूप है। यह गहरी नाराजगी, हीनभावना और टूटी हुई स्वाभिमान से उपजता है।"
लखनऊ के सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट पीके खत्री ने कहा कि कुशीनगर का आरोपी साइकोसिस से पीड़ित लगता है। यह गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसमें भ्रम और कल्पनाएं होती हैं। आरोपी बहुत उत्तेजित था और बात करने को तैयार नहीं था। यह उसके खराब मानसिक हालत को दिखाता है।