उत्तर प्रदेश के आगरा में एक किसान पर हुई पुलिसिया बर्बरता ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने इस दर्दनाक घटना पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने एक किसान को हिरासत में लेकर अमानवीय यातनाएं दीं। उसे उल्टा लटका कर इस कदर पीटा गया कि उसकी दोनों टांगें टूट गईं।
अधिकारियों के मुताबिक, आयोग की एक टीम जल्द ही आगरा जाकर पीड़ित का बयान दर्ज करेगी। इसी बीच, DIG रैंक के अधिकारी ACP रामबदन सिंह भी इस घटना की जांच कर रहे हैं। यह घटना पिछले रविवार की है, जब 42 साल के राजू शर्मा को करहरा गांव से उठाकर किरावली थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। आरोप है कि उसे चार महीने पुराने एक रिटायर फौजी की हत्या के मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मा के परिवार का कहना है कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने उसे उल्टा लटका कर बेरहमी से पीटा। चीखों और कराहों से गूंजता वह थाना मानो इंसाफ की नहीं, जुल्म की मिसाल बन गया। जब किसान घायल हालत में घर लौटा, तो परिवार के होश उड़ गए। दर्द से तड़पते किसान के लिए न्याय की तलाश शुरू हुई, लेकिन रास्ता आसान नहीं था।
परिवार के अनुसार, पहले की गई शिकायत पर जिस ACP को जांच सौंपी गई, उन्होंने एकतरफा रिपोर्ट दाखिल कर दी, बिना परिवार का पक्ष सुने। आरोपों की गंभीरता देखते हुए DCP अतुल शर्मा ने खुद अस्पताल जाकर राजू शर्मा की मेडिकल रिपोर्ट देखी। एक्स-रे में कई जगह फ्रैक्चर और चोटों के निशान साफ दिखे।
इन सबके आधार पर DCP ने सख्त कार्रवाई की सिफारिश की, जिसके बाद पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने किरावली थाना प्रभारी नीरज सिंह, सब-इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह और कॉन्स्टेबल रवि मलिक को सस्पेंड कर दिया। लापरवाही बरतने के आरोप में ACP रामप्रवेश गुप्ता को भी पद से हटाकर ट्रैफिक विभाग में भेजा गया।
मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील नरेश पारस ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग दोनों में की है।
पीड़ित के पिता राधे श्याम शर्मा की आवाज भर्रा गई जब उन्होंने कहा, “मेरा बेटा आज भी बिस्तर पर पड़ा है... अभी तो वो तीन महीने तक चल भी नहीं पाएगा।”
यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि उस तंत्र पर सवाल है, जो इंसाफ देने के बजाय खुद ही इंसान को तोड़ देता है।