उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या स्थित राम मंदिर को मिले दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और धन के गायब होने के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह एसआईटी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर बनाई गई है। ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी।
राम मंदिर ट्रस्ट ने सरकार से की ये मांग
ट्रस्ट का कहना है कि राम मंदिर को मिले दान को लेकर कुछ आरोप लगाए जा रहे हैं और इस संबंध में भ्रामक जानकारी भी फैलायी जा रही है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया है, जो आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस जांच समिति में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। समिति को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला समाजवादी पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद लिया गया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की राशि में गड़बड़ी हुई है।
समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया था कि मंदिर के दान पात्रों से 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये के बीच की राशि गायब हुई है। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। इन आरोपों के बाद अब एसआईटी पूरे मामले की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
जानें ट्रस्ट ने आरोपों पर क्या कहा
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान राशि में किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि सभी वित्तीय लेनदेन और दान की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जाती है। आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि ट्रस्ट के खातों का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट कराया जाता है। इस प्रक्रिया में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी भी शामिल रहते हैं। उन्होंने बताया कि ऑडिट की प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है और फिलहाल भी यह काम जारी है। अब तक जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने नहीं आई है।
ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर में मिलने वाले दान की गिनती और उसका हिसाब-किताब एक तय प्रक्रिया के तहत किया जाता है। इस दौरान बैंक अधिकारियों और ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रहती है, जबकि पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है। अब गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे मामले की जांच करेगा। उम्मीद है कि जांच के दौरान सभी आरोपों की पड़ताल की जाएगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी।