यूपी में 57694 ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने से कुछ घंटों पहले CM योगी ने लिया बड़ा फैसला, इसे विस्तार से समझिए

यूपी के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में विकास कार्यों को संचालित करने के लिए एक प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा। इस बड़े फैसले का सीधा मतलब यह है कि वर्तमान ग्राम प्रधान ही अगले पंचायत चुनाव होने तक गांवों के विकास कार्यों के प्रति पूरी तरह जिम्मेदार बने रहेंगे

अपडेटेड May 25, 2026 पर 10:00 PM
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उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों और त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों और त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के 57694 ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने से ठीक कुछ घंटों पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी राज्य के सभी मौजूदा ग्राम प्रधान ही अगले पंचायत चुनावों तक प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे। उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है जब कार्यकाल खत्म होने के बाद भी प्रधानी की कमान मौजूदा प्रधानों के हाथों में ही सुरक्षित रहेगी। आइए इस पूरे फैसले और इसके पीछे के कारणों को विस्तार से समझते हैं।

उत्तर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों का मौजूदा 5 साल का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि कार्यकाल खत्म होते ही गांवों के विकास कार्यों की जिम्मेदारी सरकारी अफसरों (जैसे एडीओ पंचायत) को सौंप दी जाएगी। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग द्वारा सोमवार को भेजे गए एक विशेष प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी।

उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार बनेगी प्रशासनिक समिति


यूपी के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में विकास कार्यों को संचालित करने के लिए एक प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा। इस बड़े फैसले का सीधा मतलब यह है कि वर्तमान ग्राम प्रधान ही अगले पंचायत चुनाव होने तक गांवों के विकास कार्यों के प्रति पूरी तरह जिम्मेदार बने रहेंगे। इससे पहले ग्राम प्रधान संगठनों ने सरकार से यह पुरजोर मांग की थी कि यदि समय पर चुनाव नहीं होते हैं तो वर्तमान प्रधानों को ही कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासन चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए। सरकार ने उनकी इस मांग को स्वीकार कर लिया है।

2027 के विधानसभा चुनावों के बाद होंगे पंचायत चुनाव

एजेंसी रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अगले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद ही आयोजित किए जाएंगे। तब तक गांवों की कमान प्रशासक के तौर पर मौजूदा ग्राम प्रधानों के पास ही रहेगी।

ओबीसी (OBC) आरक्षण के निर्धारण के लिए बना विशेष आयोग

पंचायत चुनावों को फिलहाल टालने और आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। सरकार ने पहले 18 मई को इस आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की थी और अब इसके अध्यक्ष व सदस्यों के नामों की घोषणा भी कर दी गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह को इस आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। रिटायर्ड एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज बृजेश कुमार व संतोष कुमार विश्वकर्मा और रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया व एसपी सिंह को इस आयोग का सदस्य बनाया गया है।

आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तारीख से 6 महीने की अवधि के लिए की गई है। यह आयोग पंचायत चुनावों में ओबीसी (OBC) आरक्षण से जुड़े डेटा की बारीकी से जांच करेगा और अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इस आयोग के काम शुरू करने से आरक्षण प्रणाली के निर्धारण की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

जून के पहले हफ्ते में आएगी फाइनल वोटर लिस्ट

उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है। आयोग द्वारा पंचायत चुनावों की अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन जून 2026 के पहले सप्ताह में कर दिया जाएगा।

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