Vijay Mallya: भारत कब लौटेगा भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या? बॉम्बे हाई कोर्ट के सवाल पर दिया जवाब

Vijay Mallya Hearing: हाई कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' (FEO Act) को चुनौती देने वाली माल्या की याचिकाओं पर तब तक विचार नहीं करेगा, जब तक वह खुद भारत नहीं लौटता। जजों ने कहा था, 'आपको वापस आना ही होगा... अगर आप वापस नहीं आ सकते तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते'

अपडेटेड Feb 18, 2026 पर 3:36 PM
Story continues below Advertisement
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने माल्या से अदालत में पेश होने को कहा था

Vijay Mallya: भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बॉम्बे हाई कोर्ट को सूचित किया है कि वह भारत लौटने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं बता सकता। माल्या के वकील ने अदालत में दलील दी कि इंग्लैंड की अदालतों के कुछ ऐसे आदेश हैं, जो उन्हें वहां के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकते है। बता दें कि इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखद की खंडपीठ कर रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने माल्या से अदालत में पेश होने की बात कही थी। और ये भी कहा था कि जब तक वो पेश नहीं होते तब तक उनके मामले में सुनवाई नहीं होगी।

'वापस आए बिना सुनवाई नहीं'

हाई कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' (FEO Act) को चुनौती देने वाली माल्या की याचिकाओं पर तब तक विचार नहीं करेगा, जब तक वह खुद भारत नहीं लौटता। जजों ने कहा था, 'आपको वापस आना ही होगा... अगर आप वापस नहीं आ सकते तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते।'


इस पर माल्या के वकील अमित देसाई ने तर्क दिया कि अगर माल्या वापस लौट आता है, तो वह 'भगोड़ा' नहीं रहेगा और उसकी याचिकाएं ही अर्थहीन हो जाएंगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति में भी सुनवाई की जा सकती है।

ब्रिटिश कोर्ट के आदेश का बहाना?

अदालत माल्या के स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई। मुख्य न्यायाधीश ने माल्या के वकील से तीखे सवाल पूछे। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, 'क्या आप उन आदेशों को केवल एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं? क्या आपने इंग्लैंड की अदालत के उन प्रतिबंधों को चुनौती देने के लिए कोई कदम उठाया है?' भारत सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने माल्या के रुख का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत में एक मजबूत कानूनी प्रणाली है और माल्या को भारतीय न्यायपालिका के सामने आत्मसमर्पण करना चाहिए।

11 मार्च को होगी अगली सुनवाई

अदालत ने गौर किया कि माल्या के वकील द्वारा दिया गया बयान उनके अटॉर्नी को मिले निर्देशों पर आधारित था। कोर्ट ने अब माल्या की कानूनी टीम को निर्देश दिया है कि, माल्या को एक औपचारिक हलफनामा दाखिल करना होगा जिसमें उनके बयान को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाए। इस हलफनामे के बाद भारत सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। हाई कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।