पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर सरकार ने घटाई एक्सपोर्ट ड्यूटी, जानिए आम जनता पर क्या होगा असर

Govt Cuts Export Tax: इस साल की शुरुआत में जब मिडिल ईस्ट संकट के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई थी, तब सरकार ने 27 मार्च को पहली बार पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह टैक्स लगाया था

अपडेटेड May 31, 2026 पर 8:21 AM
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सरकार की ओर से जारी ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये संशोधित दरें 1 जून से लागू हो जाएंगी

Govt Cuts Export Tax On Petrol Diesel ATF: वैश्विक तेल बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और मिडिल ईस्ट संकट के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला किया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी जेट फ्यूल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में कटौती करने का ऐलान किया है। सरकार की ओर से जारी ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये संशोधित दरें 1 जून 2026 से लागू हो जाएंगी।

हालांकि, इस फैसले को लेकर आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार ने क्या बदलाव किए हैं और इसका क्या असर होने वाला है।

1 जून से क्या होंगी नई दरें?


सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की औसत कीमतों की समीक्षा करने के बाद एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव करती है। नए संशोधन के बाद एक्सपोर्ट ड्यूटी का ढांचा इस तरह होगा:

पेट्रोल: अब पेट्रोल के निर्यात पर 1.5 रुपये प्रति लीटर की दर से टैक्स लगेगा। यह पूरी राशि विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) के रूप में ली जाएगी, जबकि इस पर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस नहीं वसूला जाएगा।

डीजल: डीजल के निर्यात पर अब 13.5 रुपये प्रति लीटर ड्यूटी लगेगी। यह भी पूरी तरह से विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के दायरे में आएगा और इस पर कोई रोड सेस नहीं लगेगा।

हवाई ईंधन: जेट फ्यूल के निर्यात पर सरकार ने 9.5 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी तय की है, जिसे केवल विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के रूप में ही वसूला जाएगा।

आखिर क्यों लगाया गया था यह एक्सपोर्ट टैक्स?

इस साल की शुरुआत में जब मिडिल ईस्ट संकट के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई थी, तब सरकार ने 27 मार्च 2026 को पहली बार पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह टैक्स लगाया था।

इस टैक्स को लगाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य यह था कि घरेलू तेल कंपनियां मुनाफे के चक्कर में अत्यधिक ईंधन का निर्यात न करने लगें। सरकार चाहती थी कि देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी न हो और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।

हर 14 दिन में होती है समीक्षा

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की कीमतों के रुख को देखते हुए हर दो हफ्ते में इस टैक्स की समीक्षा की जाती है। इससे पहले 16 मई को दरों में संशोधन किया गया था। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि तेल रिफाइनरी कंपनियों के लिए निर्यात के अवसरों और देश के भीतर ईंधन की सप्लाई के बीच एक सही संतुलन बनाया जा सके।

क्या आम जनता के लिए सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

इस सवाल का सीधा जवाब है 'नहीं'। सरकार ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि इस फैसले का घरेलू उपभोक्ताओं पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

यह नया नोटिफिकेशन सिर्फ उन पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होता है जिन्हें भारत से दूसरे देशों में निर्यात किया जा रहा है। इसलिए, भारत के भीतर पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले तेल की कीमतों में इस फैसले की वजह से कोई कमी या बदलाव नहीं होने जा रहा है।

सरकार फिलहाल मिडिल ईस्ट के हालातों और वैश्विक बाजार पर उसके असर पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।

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