West Bengal Election: बंगाल की जंग, पिछली बार 8 लेकिन इस बार सिर्फ दो फेज में क्यों हो रहे चुनाव?

शेड्यूल के अनुसार, पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को बाकी 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। पहले चरण के लिए नोटिफिकेशन 30 मार्च को जारी होगा और उम्मीदवार 6 अप्रैल तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 7 अप्रैल को होगी और 9 अप्रैल तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं

अपडेटेड Mar 15, 2026 पर 5:58 PM
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पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव अगले महीने दो चरणों में कराए जाएंगे।

चुनाव आयोग ने रविवार (15 मार्च) को पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बंगाल में 294 सीटों पर मतदान होना है। पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव आयोग के अनुसार राज्य में मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी। रविवार को चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि यह फैसला आयोग के अंदर लंबी चर्चा के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में चरणों की संख्या कम करना जरूरी था, इसलिए इस बार चुनाव दो चरणों में कराने का निर्णय लिया गया है। यह पिछले विधानसभा चुनाव से बड़ा बदलाव है, क्योंकि 2021 में यहां आठ चरणों में मतदान हुआ था। माना जा रहा है कि कम चरणों में चुनाव होने से प्रचार का समय घटेगा और आने वाले दिनों में पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।

ये है चुनाव का पूरा शेड्यूल

शेड्यूल के अनुसार, पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को बाकी 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। पहले चरण के लिए नोटिफिकेशन 30 मार्च को जारी होगा और उम्मीदवार 6 अप्रैल तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 7 अप्रैल को होगी और 9 अप्रैल तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। वहीं दूसरे चरण के लिए नोटिफिकेशन 2 अप्रैल को जारी किया जाएगा, नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 9 अप्रैल होगी, जबकि जांच 10 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 13 अप्रैल तक अपनी उम्मीदवारी वापस ले सकेंगे। दोनों चरणों की वोटिंग 23 और 29 अप्रैल को होगी, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी और पूरी चुनाव प्रक्रिया 6 मई तक पूरी कर ली जाएगी।


चुनाव आयोग ने दी ये जानकारी 

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में कराने का फैसला काफी चर्चा के बाद लिया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि राज्य में चरणों की संख्या कम करना जरूरी था और आयोग ने यह फैसला सभी पक्षों के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल का चुनाव एक बड़ी चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में भी मतदान होगा। इन राज्यों में असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं, जहां भी विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे।

इन राज्यों में भी होंगे चुनाव

चुनाव आयोग के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु में वोटिंग 23 अप्रैल को कराई जाएगी। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डाले गए वोटों की गिनती 4 मई को होगी। चुनाव आयोग ने बताया कि इन संयुक्त चुनावों में कुल 824 विधानसभा क्षेत्रों के करीब 17.4 करोड़ मतदाता हिस्सा लेंगे। इसके लिए लगभग 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए जाएंगे और पूरी मतदान प्रक्रिया को सुचारु रूप से कराने के लिए करीब 25 लाख चुनाव अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।

6 करोड़ से ज्यादा वोटर करेंगे मतदान

चुनाव आयोग के अनुसार, 28 फरवरी को जारी पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची में करीब 6.44 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जो विधानसभा चुनाव में वोट डालने के पात्र हैं। आयोग ने बताया कि मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में दर्ज वोटों की गिनती शुरू होने से दो राउंड पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जाएगी। चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद अब पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज़ होने की उम्मीद है, क्योंकि सभी पार्टियां दो चरणों में होने वाले इस चुनावी मुकाबले की तैयारी में जुट गई हैं, जो राज्य की अगली सरकार तय करेगा।

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