BJP की सरकार बनने से पहले और उसके बाद पश्चिम बंगाल से आईं नमाज की ये 2 तस्वीरें क्या बताती हैं?
West Bengal: पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद इस साल बकरीद के मौके पर कोलकाता में एक बिल्कुल बदली हुई तस्वीर देखने को मिली है। राज्य की नव-निर्वाचित बीजेपी सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने और कुर्बानी के मवेशियों की बिक्री को लेकर नियमों को कड़ा कर दिया है।
BJP की सरकार बनने से पहले और उसके बाद पश्चिम बंगाल से आईं नमाज की ये 2 तस्वीरें क्या बताती हैं?
West Bengal: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद इस साल ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर कोलकाता में एक बिल्कुल बदली हुई तस्वीर देखने को मिली है। राज्य की नव-निर्वाचित बीजेपी सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने और कुर्बानी के मवेशियों की बिक्री को लेकर नियमों को कड़ा किए जाने के बाद यह बदलाव सामने आया है। सालों से मध्य कोलकाता की जिस रेड रोड पर ईद की मुख्य नमाज अदा की जाती थी, इस बार वहां का नजारा बदला हुआ था।
आपको बता दें कि कोलकाता में ईद-उल-अजहा के त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सालों से रेड रोड को निर्धारित स्थान माना जाता रहा है। इस त्योहार के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों का इतना बड़ा जमावड़ा होता था कि यातायात को सुचारू रखने के लिए सड़कों को ब्लॉक करना पड़ता था और ट्रैफिक रूट डायवर्ट किए जाते थे। पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इस साल नमाज का स्थान पूरी तरह बदल दिया गया। यह नमाज ऐतिहासिक रेड रोड के बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड।
सड़कों पर नमाज नहीं: मुख्यमंत्री और कैबिनेट का फैसला
ईद की नमाज के संबंध में कोई भी आधिकारिक निर्णय लिए जाने से पहले ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और उनके कैबिनेट मंत्रियों ने यह तय कर लिया था कि सड़कों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन के लिए इस पारंपरिक स्थल को रेड रोड से हटाना एक राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और नाजुक काम था। अधिकारियों के मुताबिक इस कदम का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक व्यवस्था में आने वाली बाधाओं को रोकना और सार्वजनिक रास्तों को आम जनता के लिए खुला रखना था। प्रशासन का यह दांव सफल भी रहा। शुक्रवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर सुबह की नमाज के लिए बड़ी संख्या में नमाजी इकट्ठा हुए। इस दौरान प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और यातायात नियंत्रण के कड़े इंतजाम किए थे।
#WATCH | Kolkata: On people offering Eid prayers at Brigade Parade Ground on Eid-ul-Adha, TMC leader Javed Ahmed Khan says, “I want to thank the govt that they didn’t disallow offering namaz and gave an alternative site for it.” pic.twitter.com/F8BTmgO9Um
इस बदलाव को लेकर 'द इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में नमाजियों ने कहा कि ईद की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। कई लोगों का यह भी तर्क था कि सार्वजनिक सड़कों का उपयोग बड़े आयोजनों के लिए नहीं किया जाना चाहिए, चाहे वह धार्मिक कार्यक्रम हों, राजनीतिक रैलियां हों या फिर कोई जुलूस। मैदान पर नमाज अदा करने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि एक नई सरकार सत्ता में आई है और उसने सार्वजनिक नमाज को लेकर नियम बनाए हैं। हमें इन नियमों को स्वीकार करने में कोई समस्या नहीं है। सरकार ने हमें नमाज पढ़ने से नहीं रोका है, बल्कि केवल सड़कों पर सार्वजनिक नमाज न करने के लिए कहा है।
कोलकाता के लोगों के लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि सालों बाद रेड रोड पूरी तरह से ट्रैफिक जाम से मुक्त रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 1976 के बाद यह पहला मौका था जब ईद-उल-अजहा के उत्सव के दौरान भी रेड रोड को आम यातायात के लिए खुला रखा गया था।
The first ever Eid when Calcutta's important Red Road isn't blocked for Namaz. pic.twitter.com/nbGDNZj6Mk — Sudhanidhi Bandyopadhyay (@SudhanidhiB) May 28, 2026
सड़कों पर भीड़ रोकने के लिए मस्जिदों में शिफ्टों में हुई नमाज
सड़कों पर भीड़ को इकट्ठा होने से रोकने के लिए कोलकाता के राजा बाजार, चितपुर, बेकबागान और खिदिरपुर सहित विभिन्न इलाकों की मस्जिदों में ईद की नमाज कई शिफ्टों में आयोजित की गई। ऐसा इसलिए किया गया ताकि लोग सड़कों पर आने के बजाय मस्जिद परिसर के भीतर ही कर सकें। कुछ नमाजियों ने सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए पार्कों में भी नमाज अदा की। राजा बाजार की जामा मस्जिद में ईद की विशेष नमाज दो शिफ्टों में हुई। हर शिफ्ट में लगभग 3,000 अकीदतमंदों ने नमाज पढ़ी।
पशुओं की कुर्बानी के नियम और बाजारों पर कड़ा एक्शन
इस साल की ईद पर वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट के प्रावधानों और संबंधित अदालती निर्देशों को बेहद कड़ाई से लागू किया गया। कम्युनिटी लीडर्स और इमामों ने भी बार-बार अकीदतमंदों से मवेशियों की कुर्बानी को लेकर सरकारी नियमों का पालन करने की अपील की थी। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि 14 वर्ष से कम उम्र के मवेशियों की कुर्बानी नहीं दी जा सकती। मवेशी की उम्र 14 वर्ष से अधिक होने या उसके प्रजनन और काम करने में असमर्थ होने का आधिकारिक फिटनेस सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य कर दिया गया था।
पारंपरिक बाजारों से गायब हुए मवेशी
रिपोर्ट्स के मुताबिक कोलकाता के मुस्लिम बहुल इलाकों जैसे खिदिरपुर, मोमिनपुर, इकबालपुर और टंगरा के पारंपरिक ईद बाजारों से मवेशी पूरी तरह गायब दिखे। व्यापारियों और खरीदारों ने इसके पीछे कानूनी प्रक्रियाओं, परिवहन की दिक्कतों और किसी भी तरह की जटिलताओं या विवादों के डर को मुख्य वजह बताया। जो बाजार मवेशियों के लिए जाने जाते थे, वहां इस बार बकरे और भेड़ों की बिक्री अधिक हुई।
बकरों की कीमतों में 70-75% का भारी उछाल
मवेशियों के बजाय बकरों की तरफ परिवारों का रुझान बढ़ने से बाजारों में इनकी कीमतें आसमान छूने लगीं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक व्यापारियों ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बकरों की कीमतों में 70 से 75 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जो जानवर पहले लगभग 40000 रुपये में बिकते थे, वे इस बार 65000 से 70000 रुपये तक में बेचे गए।
कीमतों में इस भारी उछाल और आवश्यक वस्तुओं की महंगाई को देखते हुए खरीदार भी बेहद फूंक-फूंक कर खर्च कर रहे थे। कई परिवारों ने अपने खर्चों में कटौती की और ईद-उल-अजहा के आध्यात्मिक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। कई लोगों ने छोटे जानवर खरीदे तो कई परिवारों ने लागत बांटने के लिए रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ मिलकर सामूहिक रूप से हिस्सा लिया।
आपको बता दें कि सड़कों पर नमाज और भीड़ को रोकने के इन प्रशासनिक कड़े फैसलों के पीछे हाल ही में हुए कुछ तनाव भी मुख्य वजह थे। इसी महीने की शुरुआत में कोलकाता के राजा बाजार इलाके में तब तनाव की स्थिति बन गई थी, जब ट्रैफिक ब्लॉक करने पर लगी पाबंदियों के बावजूद मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार की नमाज के लिए सड़क पर एकत्र हो गए थे। इसके दो दिन बाद ही कोलकाता के तिलजला इलाके में चलाए गए एक अतिक्रमण हटाओ अभियान के विरोध में मुस्लिम बहुल पार्क सर्कस इलाके में सड़कों पर उतरी भीड़ और पुलिस के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी। इन्हीं सुरक्षा कारणों और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सरकार ने इस बार कड़े कदम उठाए थे।