Kerala CM VD Satheesan: केरल की राजनीति में पिछले 10 दिनों से जारी सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। कांग्रेस आलाकमान ने भारी विचार-विमर्श के बाद वी.डी. सतीशन (VD Satheesan) के नाम पर मुहर लगा दी है। वे केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। सतीशन ने न केवल कांग्रेस के दिग्गज नेता केसी वेणुगोपाल को पीछे छोड़ा, बल्कि पिनाराई विजयन के 'अजेय' माने जाने वाले वामपंथी किले को ढहाने के असली सूत्रधार भी वही रहे हैं।
1964 में कोच्चि के पास नेटूर में जन्मे वी.डी. सतीशन की राजनीति दिल्ली के पावर गलियारों से नहीं, बल्कि केरल की जमीन से शुरू हुई। उन्होंने केरल छात्र संघ (KSU) से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। पेशे से वकील और समाज सेवक सतीशन ने धीरे-धीरे यूथ कांग्रेस और फिर मुख्यधारा की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
सतीशन 2001 से लगातार परावूर (Paravur) निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे सदन में अपनी तार्किक और आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं।
2021 का वो मोड़ जिसने बदल दी किस्मत
सतीशन के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2021 में आया। जब कांग्रेस चुनाव हार गई थी, तब पार्टी ने अनुभवी चेहरों को छोड़कर उन्हें विपक्ष का नेता (LoP) बनाया। उनके पास पहले कभी मंत्री रहने का अनुभव नहीं था, लेकिन पिछले 5 सालों में उन्होंने जिस तरह से पिनाराई विजयन सरकार को भ्रष्टाचार, गोल्ड स्मगलिंग और आर्थिक कुप्रबंधन के मुद्दों पर घेरा, उसने उन्हें केरल में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया।
सतीशन के पक्ष में क्या रही 3 सबसे बड़ी बातें?
1. 'जनादेश के नायक': पार्टी कैडर और जनता का मानना था कि जिस नेता ने चुनाव में फ्रंट से लीड किया और 10 साल बाद ऐतिहासिक जीत दिलाई, मुख्यमंत्री बनने का हक भी उसी का है। कार्यकर्ताओं के भारी दबाव ने आलाकमान को सतीशन के नाम पर मजबूर किया।
2. सहयोगी दलों का भरोसा (IUML Factor): UDF के सबसे मजबूत सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने खुलकर सतीशन का समर्थन किया। मुस्लिम लीग का मानना था कि सतीशन की स्वीकार्यता जनता के हर वर्ग में है।
3. गुटबाजी से दूरी: केरल कांग्रेस लंबे समय से 'A' और 'I' गुटों में बंटी रही है। सतीशन ने खुद को इन पुरानी गुटबाजी से दूर रखा और युवा व आधुनिक चेहरे के रूप में उभरे। इससे पार्टी की छवि युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच बेहतर हुई।