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US Visa: ट्रंप ने पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 75 देशों के लोगों की अमेरिका में एंट्री पर लगाया बैन, जानिए आखिर भारत को क्यों मिली राहत?

US Visa Ban: ट्रंप प्रशासन द्वारा 75 देशों पर लगाए गए इमिग्रेंट वीजा बैन से भारत को बाहर रखना वैश्विक कूटनीति में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वाशिंगटन द्वारा भारतीय प्रणालियों और आवेदकों पर जताए गए गहरे भरोसे का प्रतीक है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jan 15, 2026 पर 1:44 PM
US Visa: ट्रंप ने पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 75 देशों के लोगों की अमेरिका में एंट्री पर लगाया बैन, जानिए आखिर भारत को क्यों मिली राहत?
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह फ्रीज उन देशों को लक्षित करता है जिनके आवेदक अमेरिकी सरकार पर 'वित्तीय बोझ' बन सकते है

US Visa Freeze: ट्रंप प्रशासन ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत एक बड़ा कदम उठाते हुए 75 देशों के नागरिकों के लिए 'इमिग्रेंट वीजा' की प्रोसेसिंग पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है। यह रोक 21 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। इस सूची में पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे भारत के पड़ोसी देश शामिल हैं, लेकिन भारत इस पाबंदी से बाहर है। इसका मतलब है कि ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास के लिए आवेदन करने वाले भारतीय नागरिकों पर इस विशिष्ट निलंबन का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

भारत को राहत और पड़ोसियों पर पाबंदी के कारण

ट्रंप प्रशासन द्वारा 75 देशों पर लगाए गए इमिग्रेंट वीजा बैन से भारत को बाहर रखना वैश्विक कूटनीति में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वाशिंगटन द्वारा भारतीय प्रणालियों और आवेदकों पर जताए गए गहरे भरोसे का प्रतीक है। जहां पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर अमेरिकी संदेह और उनके आवेदकों के 'सार्वजनिक कल्याण' योजनाओं पर बोझ बनने की आशंका है, वहीं भारतीयों की छवि एक 'कुशल और योगदान देने वाले' समुदाय के रूप में है।

भारत में मजबूत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, आईटी और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में कुशल श्रमशक्ति का बड़ा आधार और धोखाधड़ी के मामलों में भारी कमी ने इसे अमेरिका के लिए एक 'लो-रिस्क' और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश बना दिया है। यही कारण है कि भारतीय नागरिकों के लिए ग्रीन कार्ड और स्थायी निवास के रास्ते खुले हुए हैं, जबकि उनके पड़ोसी देश पहचान प्रबंधन और सूचना साझा करने के मानकों में कमी के कारण 'हाई-रिस्क' श्रेणी में डाल दिए गए हैं।

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