पूरी दुनिया में मचा है तेल का हाहाकार फिर भी भारत में क्यों कम बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम? दूसरे देशों की इस तुलना से समझिए पूरी तस्वीर
Petrol Diesel Price Hike India vs Global: भारतम में पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की तुलना जब हम दुनिया के अन्य देशों से करते हैं, तो पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर पेट्रोल में औसतन 22.4% और डीजल में 27% का भारी उछाल आया है
वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में आए भारी उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी कम बढ़ोतरी हुई है
Petrol-Diesel Prices Global Comparison: होर्मुज जलमार्ग के बंद होने से दुनिया भर में एनर्जी संकट खड़ा हो गया। इन संकट में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ग्लोबल क्राइसिस के बीच भारत के आम उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। दुनिया भर में फ्यूल की कीमतों पर आई एक तुलनात्मक रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में आए भारी उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी कम बढ़ोतरी हुई है।
सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) द्वारा मई 2026 में चार किश्तों 15, 19, 23 और 25 मई को की गई बढ़ोतरी पिछले करीब चार साल में पहली वास्तविक वृद्धि है।
दिल्ली में क्या हैं नए दाम और कितनी हुई बढ़ोतरी?
लगातार चार बार हुई बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में ईंधन के दाम इस प्रकार हैं:
पेट्रोल: संकट से पहले दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर था, जो अब बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर हो गया है। अब तक की कुल बढ़ोतरी ₹7.35 या 7.7% की हुई है।
डीजल: पहले डीजल ₹87.67 प्रति लीटर था, जो अब ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। इसके प्राइस में कुल बढ़ोतरी ₹7.53 या 8.6% हुई है।
दुनिया भर में मची है तबाही फिर भी भारत में है राहत
जब हम भारत की तुलना दुनिया के अन्य देशों से करते हैं, तो पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर पेट्रोल में औसतन 22.4% और डीजल में 27% का भारी उछाल आया है।
म्यांमार में पेट्रोल 90% और डीजल 110% से ज्यादा महंगा हो चुका है। पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और यूएई जैसे देशों में ईंधन के दाम 30% से 86% तक बढ़ गए हैं।
पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में प्रति व्यक्ति आय भारत से कम होने के बावजूद वहां पेट्रोल की कीमत ₹130 प्रति लीटर के पार जा चुकी है।
यूरोपीय देशों (EU-27) में पेट्रोल की औसत कीमत ₹179 और डीजल ₹184 प्रति लीटर को पार कर गई है। नीदरलैंड में पेट्रोल ₹235 और हॉन्गकॉन्ग में ₹268 प्रति लीटर बिक रहा है।
भारत में कीमतें कम रहने के ये है 3 बड़े कारण
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के $120 प्रति बैरल पार होने के बावजूद घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कई कदम उठाए:
टैक्स में भारी कटौती: सरकार ने 2021 से 2026 के बीच कई बार एक्साइज ड्यूटी घटाई। हाल ही में 27 मार्च को सरकार ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती की और डीजल पर इसे शून्य कर दिया, जिससे सरकारी खजाने पर ₹30000 करोड़ का बोझ आया।
कंपनियों ने झेला नुकसान: संकट के चरम दौर में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर ₹26 और डीजल पर रिकॉर्ड ₹82 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। कंपनियां हर दिन करीब ₹1000 करोड़ का घाटा खुद झेल रही थीं और सरकार ने 78 दिनों तक कीमतें नहीं बढ़ने दीं।
निर्यात पर सख्ती: घरेलू बाजार में तेल की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर लेवी लगा दी ताकि कंपनियां देश का तेल बाहर न बेच सकें।
राज्यों के टैक्स के कारण कीमतों में बड़ा अंतर
भले ही केंद्र सरकार का टैक्स पूरे देश में एक समान है, लेकिन अलग-अलग राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट (VAT) के कारण भारत के भीतर ही कीमतों में बड़ा अंतर है:
यहां पेट्रोल ₹110 के पार: तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और बिहार में पेट्रोल ₹110 प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है। तेलंगाना और केरल में तो यह ₹114 प्रति लीटर के भी पार है।
यहां कीमतें कम: गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, असम और गोवा जैसे राज्यों में वैट कम होने के कारण पेट्रोल ₹102 प्रति लीटर या उससे कम के स्तर पर बना हुआ है।
पेट्रोल-डीजल की ग्लोबल प्राइस लिस्ट
देश
पेट्रोल (% बदलाव)
डीजल (% बदलाव)
पेट्रोल (₹/लीटर)
डीजल (₹/लीटर)
नीदरलैंड
+18.4%
+25.6%
₹235
₹225
जर्मनी
+15.6%
+21.5%
₹210
₹192
ब्रिटेन
+18.4%
+34.0%
₹170
₹203
ब्रिटेन
+18.4%
+34.0%
₹170
₹203
म्यांमार
+89.7%
+112.7%
₹141
₹148
श्रीलंका
+38.2%
+41.8%
₹140
₹125
पाकिस्तान
+54.9%
+44.9%
₹136
₹136
अमेरिका
+44.5%
+48.1%
₹110
₹118
भारत(दिल्ली)
+7.7%
+8.6%
₹102.1
₹95.2
(स्रोत: मई 2026 तक के अंतरराष्ट्रीय ईंधन मूल्य डेटा का संकलन)
राज्यों में क्यों अलग-अलग हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए वैट का पूरा खेल
भारत में हर राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक समान नहीं होती हैं। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला केंद्रीय उत्पाद शुल्क पूरे देश में हर राज्य के लिए बिल्कुल बराबर होता है। कीमतों में यह बड़ा अंतर असल में राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और सेस के कारण आता है। हर राज्य अपनी वित्तीय जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग दर पर वैट वसूलता है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों में ईंधन की कीमतों में कई रुपये का अंतर आ जाता है।
डेटा के अनुसार, विभिन्न राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार है:
विपक्ष शासित राज्य - यहां कीमतें तुलनात्मक रूप से अधिक हैं:
राज्य
पार्टी
पेट्रोल
डीजल
तेलंगाना
कांग्रेस
₹118.3/L
₹106.7/L
केरल
INDIA ब्लॉक - LDF
₹114.9/L
₹104.1/L
कर्नाटक
कांग्रेस
₹110.3/L
₹102.5/L
तमिलनाडु
TVK-कांग्रेस सहयोगी
₹107.8/L
₹103.4/L
झारखंड
INDIA ब्लॉक - JMM
105.2/L
₹98.4/L
NDA / भाजपा शासित राज्य- यहां कीमतें तुलनात्मक रूप से कम हैं:
राज्य
पार्टी
पेट्रोल
डीजल
मध्य प्रदेश
भाजपा- यहां वैट/सेस अधिक है
₹114.0/L
₹99.6/L
बिहार
NDA - JD-U + BJP
₹113.0/L
₹99.8/L
ओडिशा
भाजपा
₹108.5/L
₹100.2/L
छत्तीसगढ़
भाजपा
₹107.8/L
₹100.8/L
असम
भाजपा
₹104.5/L
₹92.1/L
गोवा
भाजपा
₹103.9/L
₹96.5/L
ग्लोबल संकट के बीच भारत ने 4 साल में 4 बार घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम
G20 देशों में भारत इकलौती ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है जिसने संकटों के बीच भी जनता को राहत देते हुए पिछले चार साल में चार बार पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए हैं। जहां फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही थीं, वहीं भारत सरकार ने नवंबर 2021 और मई 2022 में दो बड़े एक्साइज कट करके पेट्रोल को ₹13 और डीजल को ₹16 प्रति लीटर सस्ता किया। इसके बाद भी मार्च 2024 और अप्रैल 2025 में क्रमशः तेल कंपनियों और सरकार की तरफ से ₹2-₹2 प्रति लीटर की कटौतियां की गईं।
यहां तक कि जब 2026 में होर्मुज जलमार्ग का महासंकट आया, तब भी सरकार ने सबसे पहले 27 मार्च 2026 को स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की भारी कटौती करके डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को शून्य कर दिया और करीब ₹30000 करोड़ का राजस्व नुकसान खुद झेला। इसके बाद मई 2026 में तेल कंपनियों द्वारा चार चरणों में की गई मामूली बढ़ोतरी (पेट्रोल +₹7.35 और डीजल +₹7.53) पिछले चार वर्षों में पहली वास्तविक मूल्य वृद्धि है, जो यह साबित करती है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को हर मुमकिन राहत दी गई है।