क्या इस साल सूख जाएगा भारत का मानसून? किसानों के लिए बुरी खबर! El Nino बिगाड़ सकता है पूरे सीजन का खेल
Monsoon Rain: विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में बनने वाली मौसमीय स्थिति एल नीनो (El Nino) इस साल फिर सक्रिय हो रही है। अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA का अनुमान है कि मई से जुलाई 2026 के बीच एल नीनो बनने की 82% संभावना है, जो सर्दियों तक बढ़कर 96% हो सकती है
Dry Monsoon: क्या इस साल सूख जाएगा भारत का मानसून? किसानों के लिए बुरी खबर! El Nino बिगाड़ सकता है पूरे सीजन का खेल
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल के मानसून का अनुमान घटाकर लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 90% कर दिया है। यानी देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बढ़ गई है। मौसम विभाग का कहना है कि इस साल 60% संभावना है कि मानसून कमजोर रह सकता है। ऐसे में देश की खेती और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि भारत की करीब 52% खेती आज भी बारिश पर निर्भर है।
फिर लौट रहा है एल नीनो
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में बनने वाली मौसमीय स्थिति एल नीनो (El Nino) इस साल फिर सक्रिय हो रही है। अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA का अनुमान है कि मई से जुलाई 2026 के बीच एल नीनो बनने की 82% संभावना है, जो सर्दियों तक बढ़कर 96% हो सकती है।
वैज्ञानिकों को डर है कि यह सामान्य एल नीनो नहीं, बल्कि काफी शक्तिशाली "सुपर एल नीनो" बन सकता है। इतिहास बताता है कि एल नीनो वाले करीब 60% सालों में भारत में सामान्य से कम बारिश हुई है।
बारिश कितनी नहीं, कब और कहां होगी यह ज्यादा अहम
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कुल बारिश का आंकड़ा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि बारिश का वितरण ज्यादा मायने रखता है। अगर कुछ इलाकों में ज्यादा और कुछ में बहुत कम बारिश हुई, या लंबे समय तक बारिश रुकी रही, तो खेती को भारी नुकसान हो सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड और IIT कानपुर के प्रोफेसर रघु मुर्तुगुड़े के अनुसार, इस बार मानसून के दौरान बारिश असमान रूप से बंट सकती है और लंबे "मानसून ब्रेक" की स्थिति बन सकती है, जिससे फसलों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
2027 बन सकता है सबसे गर्म साल
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मजबूत एल नीनो का असर केवल बारिश तक सीमित नहीं रहेगा। इससे दुनिया का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।
स्काइमेट वेदर के जीपी शर्मा का कहना है कि अगर एल नीनो अनुमान के मुताबिक मजबूत हुआ तो 2027, 2024 को पीछे छोड़कर अब तक का सबसे गर्म साल बन सकता है। भारत में इसका मतलब होगा- भीषण गर्मी और कम बारिश का दोहरा संकट।
किसानों के लिए बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश में देरी और बीच-बीच में लंबे सूखे दौर किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। इससे बुवाई प्रभावित होगी, लागत बढ़ेगी और उत्पादन घट सकता है।
कृषि विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि किसान धान जैसी ज्यादा पानी वाली फसलों की जगह दालें, तिलहन और मोटे अनाज (मिलेट्स) उगाने पर विचार करें। साथ ही खेतों में पानी बचाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने पर जोर देना होगा।
पानी का संकट भी बढ़ सकता है
कम बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। इससे भूजल स्तर, बांधों का जलस्तर और नदियों में पानी की मात्रा भी प्रभावित हो सकती है।
FLAME यूनिवर्सिटी के डॉ. अंजल प्रकाश के अनुसार, अगर मानसून केवल 90% बारिश देता है तो देश के कई हिस्सों में जल संकट गहरा सकता है और शहरों, किसानों तथा उद्योगों के बीच पानी को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
क्या इंडियन ओशन डाइपोल बचा पाएगा?
विशेषज्ञों की नजर इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) पर भी है। यह एक ऐसी मौसमीय स्थिति है जो कभी-कभी एल नीनो के नकारात्मक असर को कम कर देती है। उम्मीद है कि मानसून के बाद के महीनों में सकारात्मक IOD विकसित हो सकता है।
हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर एल नीनो बहुत मजबूत हुआ, तो केवल IOD के सहारे मानसून को पूरी तरह बचाना मुश्किल होगा।
इस साल भारत के सामने कम बारिश, भीषण गर्मी, खेती पर दबाव और पानी की कमी जैसी कई चुनौतियां एक साथ खड़ी हो सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीने देश के लिए जलवायु परिवर्तन की असली परीक्षा साबित हो सकते हैं।