KBC में जीते 50 लाख रुपए, अब घोटाले में जेल...चर्चित अफसर अमिता सिंह तोमर गिरफ्तार

जांच में सामने आया कि राहत राशि बांटते समय आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों को फर्जी तरीके से बाढ़ पीड़ित दिखाया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि गलत तरीके से उनके खातों में पैसा भेजा जा सके। इस मामले में तहसीलदार कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और बिचौलियों की भी मिलीभगत होने का शक है। अब तक अमिता सिंह तोमर समेत 25 पटवारियों और 100 से ज़्यादा लोगों को इस घोटाले में आरोपी बनाया जा चुका है

अपडेटेड Mar 27, 2026 पर 5:51 PM
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KBC में 50 लाख जीतने वालीं अमिता सिंह तोमर किस 'कांड' में गईं जेल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक महिला तहसीलदार को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया है। यह वही अधिकारी हैं, जिन्हें साल 2011 में टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख रुपये जीतने के बाद देशभर में पहचान मिली थी। अब उन पर करीब 2.57 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। यह मामला बाढ़ पीड़ितों के लिए आए राहत फंड में गड़बड़ी से जुड़ा है।

2.57 करोड़ का घोटाला 

अमिता सिंह तोमर उस समय बड़ौदा में तहसीलदार थीं, जब साल 2021 में श्योपुर जिले में बाढ़ राहत राशि बांटी जा रही थी। आरोप है कि उन्होंने करीब 25 पटवारियों और 100 से ज्यादा बिचौलियों के साथ मिलकर 127 फर्जी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए और करीब 2.57 करोड़ रुपये का गबन किया। इस पूरे मामले का खुलासा बड़ौदा के डिप्टी कलेक्टर द्वारा किए गए ऑडिट में हुआ। जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और आगे की कार्रवाई शुरू की।


जांच के घेरे में 100 से ज्यादा लोग

जांच में सामने आया कि राहत राशि बांटते समय आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों को फर्जी तरीके से बाढ़ पीड़ित दिखाया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि गलत तरीके से उनके खातों में पैसा भेजा जा सके। इस मामले में तहसीलदार कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और बिचौलियों की भी मिलीभगत होने का शक है। अब तक अमिता सिंह तोमर समेत 25 पटवारियों और 100 से ज़्यादा लोगों को इस घोटाले में आरोपी बनाया जा चुका है। गिरफ्तारी से बचने के लिए अमिता सिंह तोमर ने कई कोशिशें कीं। पहले उन्होंने हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल कर अग्रिम जमानत मांगी, लेकिन 17 मार्च 2026 को वहां से भी उनकी याचिका खारिज हो गई।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 और 468 (जालसाजी), 409 (आपराधिक विश्वास भंग) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज किया है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत भी कार्रवाई की गई है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद पुलिस ने गुरुवार को अमिता सिंह तोमर को उनके ग्वालियर स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही उन्हें विजयपुर के तहसीलदार पद से हटा दिया गया था। श्योपुर के पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे इसमें और अधिकारियों व कर्मचारियों के शामिल होने की भी संभावना है।

हाल के वर्षों में अमिता सिंह तोमर अपने सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों को लेकर कई बार विवादों में रही हैं। उन्होंने कई बार प्रशासन के कामकाज की खुलकर आलोचना की थी। संविधान से जुड़े एक पोस्ट पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के कारण भी वे चर्चा में आई थीं। इसके अलावा, उन्होंने अपने बार-बार होने वाले तबादलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। साल 2023 में तहसीलदार का पद न मिलने पर उन्होंने अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी।

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