
छत्तीसगढ़ के बस्तर की महिला नक्सली, जो कभी घने जंगलों में हथियार लेकर रहती थीं, हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रही हैं। सरकार के बाद रायपुर में 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' (National Handloom Day) के कार्यक्रम में रैंप पर उतरीं।
पारंपरिक हेंडलूम साड़ियां पहने इन महिलाओं ने दर्शकों के सामने आत्मविश्वास के साथ वॉक किया और उन्हें जोरदार तालियां मिलीं। उनकी भागीदारी ने सशस्त्र विद्रोह से एक नई जिंदगी की ओर उनके सफर को उजागर किया और साथ ही भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा का जश्न भी मनाया।
कार्यक्रम में साड़ियों का प्रदर्शन करते हुए इन महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता विष्णु देव साय इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
उन्होंने बस्तर में विकास की गति बढ़ाने के लिए केंद्रीय बुनियादी ढांचा योजनाओं में विशेष छूट की मांग की। यह क्षेत्र वर्षों से माओवादी विद्रोह का गवाह रहा है।
माओवादी समूहों के ख़िलाफ़ खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों और 'ऑपरेशन कगार' (Operation Kagar) सहित कई वर्षों के सुरक्षा अभियानों के बाद बस्तर को 'नक्सल-मुक्त' घोषित किया गया है।