11 हजार फीट की ऊंचाई पर चमत्कार! चीन सीमा के पास 13.15 km लंबी जोजीला टनल ब्रेकथ्रू ब्लास्ट के लिए तैयार, दुनिया में कहीं नहीं ये खूबियां

चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से सटे होने के कारण यह टनल भारतीय सेना के लिए एक बहुत बड़ा सुरक्षा एसेट साबित होगी। इससे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य बलों की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स की आपूर्ति और रणनीतिक पहुंच को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 8:03 PM
समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर भारत ने इंजीनियरिंग का एक ऐसा महाचमत्कार कर दिखाया है

समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर भारत ने इंजीनियरिंग का एक ऐसा महाचमत्कार कर दिखाया है, जिसने दुनिया को हैरान कर दिया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों को आपस में जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जोजीला टनल का काम अपने सबसे बड़े पड़ाव पर पहुंच गया है। 9 जून को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस सुरंग का अंतिम ब्लास्ट (Breakthrough Blast) करेंगे। इसके साथ ही इस सुरंग की खुदाई का काम पूरा हो जाएगा और कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी का सपना सच होने के बेहद करीब पहुंच जाएगा।

दुनिया में कहीं नहीं जोजीला जैसी खूबियां

जोजीला टनल कोई साधारण सुरंग नहीं है। हिमालय की दुर्गम और संवेदनशील पहाड़ियों को चीरकर बनाई गई इस सुरंग की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे वैश्विक स्तर पर अद्वितीय बनाती हैं।

  • 1- सबसे ऊंची और सबसे लंबी सुरंग: समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह सुरंग दुनिया की सबसे ऊंची और सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब, दोतरफा सड़क सुरंग बनने जा रही है।
  • 2- अल्ट्रा-आधुनिक ऑस्ट्रियाई तकनीक: इस सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियाई टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक से किया गया है। यह तकनीक हिमालय की नाजुक भूविज्ञान और बदलती चट्टानों की स्थिति के लिए सबसे सुरक्षित और उपयुक्त मानी जाती है। इसमें निरंतर जियोटेक्निकल मॉनिटरिंग और तुरंत रॉक बोल्टिंग की जाती है।
  • 3- सुरक्षा का अनोखा रिकॉर्ड: बेहद कठिन परिस्थितियों और कड़ाके की ठंड के बावजूद इस प्रोजेक्ट ने निर्माण के दौरान 10 मिलियन (1 करोड़) सुरक्षित मैन-ऑवर्स का एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है।


रणनीतिक और भौगोलिक महत्व: चीन-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगी ताकत

जोजीला पास वर्तमान में भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण और खतरनाक पहाड़ी गलियारों में से एक है। भारी बर्फबारी, भीषण हिमस्खलन और भीषण ठंड वाले मौसम की वजह से यह रास्ता साल के कई महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट जाता है। जोजिला टनल के पूरी तरह चालू होने के बाद श्रीनगर और लद्दाख के बीच साल के 365 दिन संपर्क बना रहेगा। इससे द्रास, कारगिल और लेह जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी।

सेना के लिए गेम-चेंजर

चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से सटे होने के कारण यह टनल भारतीय सेना के लिए एक बहुत बड़ा सुरक्षा एसेट साबित होगी। इससे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य बलों की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स की आपूर्ति और रणनीतिक पहुंच को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

यह पूरा कॉरिडोर केवल एक सुरंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एप्रोच रोड, पुल और कई अन्य सुरक्षात्मक संरचनाएं शामिल हैं। टनल रोड और पुलों को मिलाकर पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 30.894 किलोमीटर है। इसकी मुख्य सिंगल-ट्यूब सुरंग की लंबाई 13.153 किलोमीटर है, जो बालटाल (सोनमर्ग) के वेस्ट पोर्टल से शुरू होकर मीनामार्ग (द्रास/कारगिल) के ईस्ट पोर्टल पर समाप्त होती है। इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का निर्माण 1 अक्टूबर 2020 को शुरू हुआ था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2020 को नीलग्रार टनल पर पहला ब्लास्ट किया गया था। प्रोजेक्ट का पहला भाग जिसमें एप्रोच रोड, पुल, नीलग्रार की जुड़वां सुरंगें, कट-एंड-कवर वर्क और स्नो गैलरी शामिल हैं, 15 मार्च 2025 को ही सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया था।

समाजिक-आर्थिक विकास और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

रणनीतिक फायदों के अलावा यह टनल स्थानीय नागरिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। सर्दियों के मौसम में जो इलाका देश से कट जाता था, वहां अब आवश्यक सेवाओं, दवाओं और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति निर्बाध रूप से हो सकेगी। लद्दाख और कश्मीर के बीच बारहमासी कनेक्टिविटी होने से स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन और पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का पूरी तरह कायाकल्प होना तय है।

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