पैरेंटिंग को आसान बनाएंगी अनुष्का-विराट की ये 4 सीख, माता-पिता के आएंगी काम

मां बनने के बाद अनुष्का शर्मा के लिए जिंदगी और फैसलों को देखने का नजरिया बदल गया। उन्होंने बताया कि पैरेंट बनने के बाद उन्हें खुद पर पहले से ज्यादा भरोसा हुआ और अपने फैसलों को लेकर वह ज्यादा कॉन्फिडेंट बनीं। परिवार और बेटी की जरूरतों को समझते हुए उन्होंने अपने काम और प्राइवेट लाइफ के बीच बैलेंस को प्रायोरिटी दी।

अपडेटेड Aug 26, 2026 पर 10:57 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google

मां बनने के बाद जिंदगी में कई चीजें बदल जाती हैं। रोज के फैसलों से लेकर काम और प्राइवेट लाइफ तक, एक महिला कई बातों को नए नजरिए से देखने लगती है। अब सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि उसके लिए क्या सही है, बल्कि बच्चे और परिवार के लिए क्या बेहतर होगा, यह भी उतना ही जरूरी हो जाता है।

एक्टर अनुष्का शर्मा ने भी मां बनने के बाद अपनी सोच में आए ऐसे ही बदलाव बताए है। वे कहती है पैरेंट बनने के बाद उन्हें अपने फैसलों पर पहले से ज्यादा भरोसा होने लगा। उन्होंने यह भी महसूस किया कि बच्चे के साथ समय बिताना और उसकी जरूरतों को समझना कई बार काम से जुड़े फैसलों को भी बदल सकता है।

okgggg


1. बच्चे की जरूरत पहले समझें

पेरेंटिंग में हर समय जिम्मेदारियों को बिल्कुल बराबर बांटना जरूरी नहीं होता। बच्चे की उम्र और जरूरत के हिसाब से कई बार एक पेरेंट की मौजूदगी ज्यादा जरूरी हो सकती है। अनुष्का शर्मा ने भी महसूस किया कि उनकी बेटी को उनकी ज्यादा जरूरत थी। इसलिए उन्होंने अपने काम को कम करने का फैसला लिया, ताकि परिवार और बच्चे के लिए समय निकाल सकें।

2. करियर और बच्चों के बीच बैलेंस

आजकल माता-पिता पर बच्चों की परवरिश को लेकर काफी प्रेशर रहता है। किसी का बच्चा ज्यादा एक्टिविटीज में हिस्सा ले रहा होता है, कोई परिवार करियर और बच्चों के बीच अलग तरह से बैलेंस बना रहा होता है। ऐसे में दूसरों से यह जानने की जरूरत नहीं कि आप सही पेरेंट हैं या नहीं। अपने बच्चे की जरूरत और अपने परिवार की जरुरत को समझकर लिया गया फैसला सही होता है।

3. खुद कॉन्फिडेंट रहें

बच्चे की जिम्मेदारी आने के बाद कई नये फैसले लेने पड़ते हैं। शुरुआत में ये फैसले मुश्किल लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे माता-पिता अपने एक्सपीरियंस और खुद पर भरोसा करना सीखते हैं। कभी-कभी दूसरों की सलाह को नजरअंदाज करना पड़ता है। सबसे जरूरी बात यह है कि फैसला सोच-समझकर लिया जाए और अपने बच्चे की जरूरत को ध्यान में रखा जाए।

4. बच्चे के साथ खुद भी बदलें

बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उनकी जरूरतें और पसंद भी बदलती रहती हैं। जो चीज आज बच्चे के लिए जरूरी है, हो सकता है कुछ समय बाद उसकी जरूरत न रहे। इसलिए पेरेंटिंग में एक ही तरीके को हमेशा सही मानकर चलना जरूरी नहीं है। समय के साथ अपने फैसलों को बदलना और बच्चे की बदलती जरूरतों को समझना भी अच्छी पेरेंटिंग का हिस्सा है।

अनुष्का शर्मा की बातों से समझ आता है कि पेरेंटिंग में हर परिवार का तरीका अलग हो सकता है। जरूरी यह नहीं कि आप दूसरों की तरह सबकुछ करें, बल्कि यह है कि अपने बच्चे की जरूरत को समझकर सही फैसला लें। खुद पर भरोसा रखें, जरूरत पड़ने पर अपना तरीका बदलें और बच्चे के साथ-साथ खुद भी सीखते रहें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।