क्या आपने कभी तेज सिरदर्द, थकान या तबीयत खराब होने के बावजूद सिर्फ इसलिए काम किया है क्योंकि छुट्टी लेने का मन नहीं हुआ? कई लोग आराम की जरूरत महसूस करने के बाद भी लैपटॉप खोल लेते हैं और काम पूरा करने में लग जाते हैं। उन्हें लगता है कि थोड़ा और काम कर लेने के बाद आराम कर लेंगे, लेकिन यही सोच कई बार उन्हें लगातार काम और प्रेशर के एक ऐसे चक्र में ले जाती है, जिसे वे खुद भी आसानी से पहचान नहीं पाते। साइकोलॉजी में इस बिहेवियर को एक खास नाम दिया गया है और इसके पीछे कई दिलचस्प कारण बताए जाते हैं।
बीमारी में भी काम करने के कारण
बीमार होने के बावजूद काम करते रहने का कारण हर किसी के लिए अलग हो सकता है। किसी को अपना काम पसंद होता है और उसे लगता है कि थोड़ा काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। वहीं कोई इस डर से काम करता रह सकता है कि छुट्टी लेने पर काम जमा हो जाएगा, बॉस नाराज हो सकते हैं या टीम में उसकी छवि खराब हो सकती है। रिसर्च में काम का ज्यादा बोझ, स्ट्रेस, जॉब इनसिक्योरिटी, कम सपोर्ट और छुट्टी लेने से जुड़ा प्रेशर जैसे कई कारण सामने आए हैं।
कई लोगों के मन में यह सोच चलती रहती है कि पहले जरूरी काम निपटा लेते हैं, फिर आराम करेंगे। उन्हें लगता है कि आज छुट्टी लेने से ईमेल बढ़ जाएंगे, डेडलाइन छूट सकती है या वापस आने पर काम और ज्यादा मिल जाएगा। इस तरह छुट्टी लेना उन्हें आराम के बजाय एक नई परेशानी जैसा लगने लगता है। नतीजा यह होता है कि शरीर आराम मांग रहा होता है, लेकिन दिमाग काम अधूरा छोड़ने को लेकर परेशान रहता है।
काम करने की हर व्यक्ति की अलग सोच
दो लोग बीमारी के दौरान लैपटॉप खोलकर काम कर सकते हैं, लेकिन उनका माइंडसेट पूरी तरह अलग हो सकती है। एक सोच सकता है कि उसे अपना काम पसंद है और वह अपनी केपेसिटी के हिसाब से थोड़ा काम कर सकता है। दूसरा अपराध-बोध, नौकरी खोने के डर या दूसरों को निराश करने की चिंता में काम कर सकता है।
कई बार बीमारी में भी काम करने की वजह सिर्फ व्यक्ति की सोच नहीं होती, बल्कि उसका वर्कप्लेस भी जिम्मेदार हो सकता है। अगर ऑफिस में काम का प्रेशर बहुत ज्यादा हो, छुट्टी लेने को लेकर अच्छा माहौल न हो या मैनेजर की तरफ से लगातार काम पूरा करने की उम्मीद हो, तो कर्मचारी बीमार होने पर भी आराम करने से बच सकता है।
बीमारी के दौरान कभी किसी जरूरी काम को पूरा कर देना और हर बार बीमार होने के बावजूद काम करते रहना दो अलग बातें हैं। यदि किसी को काम से अलग होना मुश्किल लगता है, लगातार काम के बारे में सोचता है, तो यह आदत धीरे-धीरे ज्यादा काम करने की प्रॉब्लम हो सकती है। लगातार बीमारी में भी काम करने से यह सोच मजबूत हो सकती है कि आराम करने के बजाय काम करते रहना ही सही है।
इसलिए कहा जाता है कि बीमारी में काम करना हर बार मेहनत या जिम्मेदारी की निशानी नहीं होता है। कई बार इसके पीछे काम के प्रेशर, नौकरी को लेकर चिंता या ऑफिस का माहौल भी हो सकता है। इसलिए जरूरत पड़ने पर आराम करना और अपनी सेहत को समय देना भी जरूरी है।