आखिरी गाने से फिर गूंजेगी आशा ताई की आवाज! उनके 93वीं जयंती पर

महान गायिका आशा भोसले की 93वीं जयंती पर आज पूरा संगीत जगत उन्हें याद कर रहा है। उनकी पहली जयंती उनके निधन के बाद मनाई जा रही है, इसलिए यह दिन फैंस के लिए बेहद भावुक है। इस खास मौके पर उनका आखिरी रिकॉर्ड किया गया गाना ‘ऐ मेरी जिंदगी, तू छुपी है कहां’ भी रिलीज हो रहा है। वहीं, मुंबई में 93 सुपरहिट गानों के जरिए उन्हें खास संगीत श्रद्धांजलि दी जा रही है।

अपडेटेड Sep 08, 2026 पर 9:15 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google

एवरग्रीन सिंगर आशा भोसले की सुरीली आवाज का जादू आज भी म्यूजिक लवर के बीच कायम है। 8 सितंबर को उनकी 93वीं जयंती पर सभी उन्हें याद कर रहे है। उनके निधन के बाद यह पहली बर्थ एनिवर्सरी है, इसलिए यह दिन उनके चाहने वालों के लिए बेहद भावुक है। इस मौके पर उनका आखिरी रिकॉर्ड किया गया फिल्मी गाना भी रिलीज किया जा रहा है। साथ ही, मुंबई में उनके यादगार गानों के जरिए उन्हें खास अंदाज में श्रद्धांजलि दी जा रही है।

संगीत की दुनिया में आशा ताई का शानदार सफर


आशा भोसले के फैंस के लिए उनकी जयंती का दिन बेहद खास है। इस दिन उनका आखिरी रिकॉर्ड किया गया फिल्मी गाना “ऐ मेरी जिंदगी, तू छुपी है कहां” रिलीज हो रहा है। यह गाना साल 2023 में रिकॉर्ड किया गया था और फिल्म ‘ओम का हरि’ का हिस्सा है। आशा ताई ने यह गाना अपनी तबीयत खराब होने से पहले शंकर महादेवन और निलाद्री कुमार के साथ तैयार किया था। आशा भोसले की जयंती पर मुंबई के विले पार्ले दीनानाथ मंगेशकर नाट्यगृह में ‘दिल में आशा’ नाम से खास म्यूजिकल ट्रिब्यूट कार्यक्रम रखा गया है। इस इवेंट में उनकी म्यूजिकल जर्नी को याद किया जा रहा है। जिसमे 12 घंटे तक आशा जी के 93 सुपरहिट हिंदी गाने पेश किए जा रहे हैं। इस तरह उनके जन्मदिन को उनके ही सदाबहार गानों के साथ यादगार बनाया जा रहा है।

 

हजारों गानों से बनाई अलग पहचान

आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। उनका परिवार संगीत से गहराई से जुड़ा हुआ था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर जाने-माने शास्त्रीय गायक और रंगमंच कलाकार थे। बड़ी बहन लता मंगेशकर भी संगीत की दुनिया की महान गायिका बनीं। ऐसे माहौल में आशा जी ने बचपन से ही संगीत सीखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। आशा भोसले ने अपने लंबे संगीत करियर में कई भाषाओं में गाने गाए। करीब 8 दशकों तक उन्होंने अपनी आवाज से फिल्मी संगीत को नई पहचान दी। उन्होंने 20 से ज्यादा भाषाओं में 12 हजार से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दी। रोमांटिक गीतों से लेकर कैबरे, गजल और भाव भरे गीतों तक उन्होंने अलग-अलग तरह के गाने गाकर अपनी पहचान शाबित की।

 

संगीत की दुनिया में उनके लंबे और शानदार योगदान को देखते हुए आशा भोसले को कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें दादासाहब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उनकी आवाज और गाने आज भी कई जनरेशन के बीच पॉपुलर हैं। आशा भोसले ने अपनी सुरीली आवाज से संगीत की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई, जिसे भुला पाना आसान नहीं है। उनके गाने आज भी लोगों को पुराने खूबसूरत पलों की याद दिलाते हैं। उनकी आवाज में हर तरह के गीत को खास बना देती थी। शायद यही कारण है कि आशा ताई हमारे बीच न होते हुए भी अपने संगीत से हमेशा लोगों के बीच मौजूद रहेंगी।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।