बच्चों के लिए मोबाइल, टीवी और टैबलेट आजकल पढ़ाई और एंटरटेनमेंट का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन जब बच्चा जरूरत से ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताने लगे, तो इसका असर उसकी नींद, खेलकूद, पढ़ाई और रोज की आदतों पर पड़ सकता है। इसलिए माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि बच्चे की उम्र के हिसाब से कितना स्क्रीन टाइम ठीक है और कब इसे कम करने की जरूरत है।
स्क्रीन को पूरी तरह बंद करना हर बार जरूरी नहीं होता, बल्कि सही बैलेंस बनाना ज्यादा जरूरी है। बच्चों को स्क्रीन के साथ खेलने, किताबें पढ़ने, बाहर घूमने और परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताना सिखाएं। बच्चों के लिए सही स्क्रीन टाइम बहुत जरुरी है और ज्यादा स्क्रीन देखने से परेशानियां हो सकती है।
बच्चे को लगातार मोबाइल, टीवी या टैबलेट देखने की आदत न लगने दें। कुछ समय स्क्रीन देखने के बाद उसे उठने, चलने-फिरने या आंखों को आराम देने के लिए कहें। पढ़ाई के दौरान भी छोटे-छोटे ब्रेक जरूरी हैं। इससे बच्चा लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से बच सकता है। जब बच्चा मोबाइल मांगे, तो उसकी जगह किताब, पजल, ड्रॉइंग, खिलौने या कोई आउटडोर गेम खेलने का विकल्प दें। इससे बच्चा लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से बच सकता है।
टाइम टेबल बनाएं और सजा नहीं इनाम दें
स्क्रीन टाइम कम करने पर बच्चे को सजा देने या मोबाइल पूरी तरह छीनने के बजाय उसकी कोशिश के लिए छोटा इनाम दें, जैसे पसंदीदा गेम खेलने का मौका, पार्क घूमने जाना या उसकी पसंद की एक्टिविटी करना। स्क्रीन टाइम कम करने की शुरुआत बच्चे की उम्र के हिसाब से एक तय सीमा बनाने से करें। 2 साल से कम उम्र के बच्चों को वीडियो कॉल को छोड़कर स्क्रीन से दूर रखना बेहतर है। 2 से 5 साल के बच्चों के लिए रोज करीब 1 घंटे तक अच्छी और उम्र के हिसाब से सही कंटेंट दिखाया जा सकता है। 6 साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए रोज करीब 2 घंटे तक स्क्रीन टाइम रखा जा सकता है।
सिर्फ मोबाइल छीन लेने से स्क्रीन टाइम कम करना मुश्किल हो सकता है। बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल के लिए एक फिक्स टाइम रखें और धीरे-धीरे उनकी आदत को कम करें। स्क्रीन के बीच छोटे-छोटे ब्रेक दिलाएं और खाली समय में उन्हें खेल, किताबें, ड्रॉइंग, आउटडोर एक्टिविटी या परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें। खाना खाने और सोने से पहले स्क्रीन से दूरी रखने का रूल भी बनाया जा सकता है।
दिन के कुछ समय को पूरी तरह नो-स्क्रीन रखें। खासकर खाना खाते समय और सोने से पहले मोबाइल या टीवी से दूरी बनाने का नियम बनाया जा सकता है। शुरुआत में बच्चा इसका विरोध कर सकता है, लेकिन घर के सभी लोग इस नियम का पालन करेंगे तो उसके लिए इसे अपनाना आसान होगा। बच्चा चिड़चिड़ा रहने लगे, लोगों से आमने-सामने बातचीत कम करे या खुद को दूसरों से अलग रखने लगे, तो उसके स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना चाहिए।
पैरेंट्स भी बनें रोल मॉडल
बच्चों की स्क्रीन की आदत कम करने में माता-पिता की भूमिका भी काफी अहम होती है। बच्चा लगातार कई घंटे मोबाइल, टीवी या टैबलेट देखता है, तो उसकी आंखों पर जोर पड़ सकता है और शरीर में दर्द या गलत पॉश्चर की प्रॉब्लम हो सकती है। देर तक स्क्रीन देखने से नींद भी प्रभावित हो सकती है और बच्चा खेलकूद जैसी फिजिकल एक्टिविटी से दूर हो सकता है। इसलिए स्क्रीन के बीच-बीच में ब्रेक देना और बच्चे को थोड़ा चलने-फिरने के लिए कहना जरूरी है। बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम का असर बच्चे के मूड और मेंटल हेल्थ पर भी पड़ सकता है।
यदि पेरेंट्स शुरुआत से ही बच्चों में बैलेंस रूटीन और अच्छी डिजिटल आदतें डेवलप करें, तो इस तरह वे टेक्नोलॉजी का फायदा उठाते हुए उसके नेगेटिव इफेक्ट से बच सकते हैं। बच्चों के लिए टेक्निक से पूरी तरह दूरी बनाना जरूरी नहीं है, बल्कि उन्हें इसका सही तरीके से इस्तेमाल करना सिखाना ज्यादा जरूरी है।