आपका रत्न काम क्यों नहीं कर रहा? रत्न धारण करते ही बदलें ये आदतें, वरना नहीं मिलेगा फल!

रत्न पहनना ज्योतिष में एक पुरानी परंपरा मानी जाती है। लोगों का विश्वास है कि अलग-अलग रत्नों का संबंध अलग ग्रहों से होता है और इन्हें कुंडली के अनुसार पहनने से जीवन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी वजह से कई लोग अपनी समस्याओं और ग्रहों की स्थिति के आधार पर नीलम, पुखराज, माणिक या मोती जैसे रत्न धारण करते हैं।

अपडेटेड Sep 09, 2026 पर 11:23 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google

भारतीय ज्योतिष में रत्नों को खास महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि हर रत्न किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है और सही रत्न पहनने से पॉजिटिव एनर्जी मिल सकती है। इसी वजह से लोग अपनी कुंडली और ग्रहों की स्थिति के अनुसार नीलम, पुखराज, माणिक, मोती जैसे अलग-अलग रत्न पहनते हैं। कई लोग इन्हें अपनी परेशानियों को दूर करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने की उम्मीद से भी धारण करते हैं।

लेकिन सिर्फ रत्न खरीदकर पहन लेना ही काफी नहीं माना जाता। मान्यता के अनुसार गलत तरीके से रत्न पहनने या उसके बाद कुछ खास गलतियां करने से इसका शुभ प्रभाव कम हो सकता है। इसलिए ज्योतिष में रत्न पहनने के समय और उसके बाद कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

रत्न पहनते समय रखें ये सावधानियां

1. दूसरों को देखकर रत्न न पहनें


ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रत्न का चुनाव व्यक्ति की कुंडली, ग्रहों की स्थिति और चल रही दशा जैसी बातों को देखकर किया जाता है। हर व्यक्ति के लिए एक ही रत्न सही हो, यह जरूरी नहीं है। किसी जानने वाले को कोई रत्न पहनने से फायदा महसूस हुआ है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वही रत्न आपके लिए भी सही रहेगा। इसलिए सिर्फ अपनी राशि देखकर या किसी की सलाह सुनकर तुरंत महंगा रत्न खरीदना सही तरीका नहीं माना जाता।

2. नकली चमक के झांसे में आकर न पहनें रत्न

बाजार में प्राकृतिक रत्नों के अलावा ट्रीटेड और आर्टिफिशियल पत्थर भी मिलते हैं। कई बार इनकी पहचान आम खरीदार के लिए आसान नहीं होती। इसलिए रत्न खरीदते समय उसकी क्वालिटी, असली होने की जानकारी और सर्टिफिकेशन पर ध्यान देना चाहिए। रत्न खरीदते समय उसकी चमक देखकर अट्रैक्ट होना स्वाभाविक है, लेकिन केवल सुंदर दिखने वाला पत्थर ही अच्छा हो, यह जरूरी नहीं है।

3. एक साथ कई रत्न पहनने से बचें

एक साथ कई रत्न पहनना सिर्फ फैशन या सुंदरता के लिए नहीं होता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार अलग-अलग रत्नों का संबंध अलग ग्रहों से माना जाता है और कुछ ग्रहों के लिए सही नहीं माना जाता। जैसे नीलम को शनि और माणिक को सूर्य से जोड़ा जाता है। इसलिए इन जैसे रत्नों को एक साथ पहनने से पहले कुंडली के आधार पर सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

4. रत्न पहनने पर लाइफस्टाइल और आदतों पर ध्यान दें

कुछ लोगों को रत्न धारण करने के बाद खानपान और बिहेवियर में संयम रखने की सलाह दी जाती है। यदि किसी ज्योतिषी ने आपकी सिचुएशन और रत्न के अनुसार किसी खास चीज से बचने की सलाह दी है, तो उसे नजरअंदाज करने से पहले उनसे फिर से जानकारी ले लें।

5. रत्न की साफ-सफाई रखना भी जरूरी

यदि किसी पूजा, धार्मिक आयोजन या परिवार की परंपरा में रत्न को उतारने का कोई विशेष नियम बताया गया है, तो उस परंपरा के अनुसार चल सकते हैं। रत्न पहनने से जुड़ी ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में साफ-सफाई का ध्यान रखने की बात कही जाती है। ऐसा कोई एक नियम नहीं है कि रोज किसी खास स्थिति में रत्न को उतारना ही पड़े। रत्न को संभालकर रखने से उसकी चमक और उसकी स्थिति भी लंबे समय तक अच्छी बनी रह सकती है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। रत्न धारण करने से पहले अपनी कुंडली और परिस्थिति के अनुसार किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।