
साफ-सुथरे और सूखे वातावरण का रखें विशेष ध्यान
बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा खतरा फंगल इंफेक्शन से होता है। इसलिए पालतू जानवरों की जगह जैसे बिस्तर या खेलने का एरिया बिल्कुल सूखा और साफ होना चाहिए। अगर बिस्तर गीला हो जाए तो तुरंत बदलें।
पंजों और बालों की सफाई को बनाए रखें रूटीन
मानसून में सड़कों पर कीचड़ और गंदगी होना आम बात है। ऐसे में जब भी पेट बाहर से आए, उसके पंजों और शरीर के बालों को अच्छे से साफ करें। इससे इंफेक्शन और स्किन संबंधी समस्याओं से बचाव होगा।
भीगने के बाद तुरंत सुखाएं शरीर
अगर आपका पेट बारिश में भीग गया है या आपने उसे नहलाया है, तो उसकी त्वचा को अच्छी तरह से सुखाना बेहद जरूरी है। गीली त्वचा पर फंगस और बैक्टीरिया आसानी से पनपते हैं। टॉवल से पोंछने के बाद हेयर ड्रायर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
ताजे खाने और स्वच्छ पानी की दें अहमियत
बारिश में खाना जल्दी खराब हो सकता है, जिससे पेट्स को पेट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। उन्हें हमेशा ताजा, हल्का और साफ भोजन दें। पानी उबला या फिल्टर किया हुआ ही पिलाएं और उनके खाने-पीने के बर्तन रोजाना साफ करें।
वेटरनरी केयर को न करें नजरअंदाज
मानसून में वायरल और फंगल बीमारियां तेजी से फैलती हैं। समय-समय पर वेटरनरी डॉक्टर से चेकअप कराना जरूरी है। ड-वॉर्मिंग, टीकाकरण और जरूरी सप्लीमेंट या एंटी-फंगल पाउडर की सलाह लेना न भूलें।
गरज-चमक से डरे तो साथ रहें
बिजली की तेज आवाज या गरज-चमक से कई पालतू जानवर डर जाते हैं। ऐसे में उन्हें अकेला छोड़ना सही नहीं होगा। उन्हें गोद में लें, शांत करें या उनके पसंदीदा खिलौनों से उन्हें व्यस्त रखें।
प्यार और धैर्य से करें देखभाल
बारिश के मौसम में थोड़ी सी सावधानी और ढेर सारा स्नेह पालतू जानवरों को स्वस्थ और खुश रख सकता है। इस मौसम में उनकी जरूरतों को समझें और उन्हें सुरक्षित माहौल दें, ताकि वे बीमारियों से बचे रहें।