बच्चों की अच्छी परवरिश और देखभाल सिर्फ पढ़ाई और खेल नहीं होती, बल्कि उनकी रोज की आदतों का भी बड़ा असर पड़ता है। सुबह उठने का तरीका, दिन की शुरुआत, खुद के छोटे-छोटे काम करना और कुछ समय योग या शांत रहने जैसी आदतें बच्चों को धीरे-धीरे अनुशासन और जिम्मेदारी समझने में मदद कर सकती हैं। बचपन में सीखी गई ये छोटी बातें आगे चलकर उनकी सोच और व्यवहार का हिस्सा बन सकती हैं।
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु भी बच्चों को अच्छी आदतें सिखाने के लिए प्यार और सही माहौल देने पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि बच्चों पर हर बात थोपने के बजाय उन्हें खुद सीखने और समझने का मौका देना चाहिए। योग, जागरूकता, जिम्मेदारी और खुश होकर दिन की शुरुआत जैसी उनकी कुछ सीख बच्चों के डेली रूटीन का हिस्सा बनाई जा सकती हैं।
1. हंसते हुए सुबह की शुरुआत
सद्गुरु का मानना है कि बच्चों के लिए सुबह का माहौल शांत और अच्छा होना चाहिए। उन्हें सुबह उठते ही डांटने या ढेर सारी जिम्मेदारियां याद दिलाने के बजाय प्यार और खुशी के साथ दिन की शुरुआत करने दें। बच्चों को यह महसूस कराना जरूरी है कि सुबह उठना कोई परेशानी नहीं, बल्कि नए दिन की शुरुआत है। बच्चा मुस्कुराते हुए और अच्छे मूड में अपना दिन शुरू करता है, तो उसका पूरा दिन भी बेहतर तरीके से गुजर सकता है।
बच्चों के डेली रूटीन में योग को भी शामिल किया जाना चाहिए। सद्गुरु बच्चों को कम उम्र से ही योग से जोड़ने की बात करते हैं, लेकिन यह उनकी उम्र और शरीर के हिसाब से होना चाहिए। बच्चों पर मुश्किल आसन या लंबे समय तक योग करने का प्रेशर नहीं डालना चाहिए। आसान योग और हल्की फिजिकल एक्टिविटी को मजेदार तरीके से कराया जा सकता है, ताकि बच्चे इसकी आदत बना सकें।
3. बच्चों को दें जिम्मेदारियां
बच्चों को जिम्मेदार बनाने के लिए हर काम उनके माता-पिता का कर देना सही नहीं है। उनकी उम्र के हिसाब से छोटी-छोटी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। जैसे अपना बिस्तर ठीक करना, खिलौने सही जगह रखना या अपनी चीजों को संभालकर रखना। सद्गुरु के विचारों के मुताबिक, बच्चे सिर्फ समझाने से नहीं, बल्कि अपने माता-पिता को देखकर भी बहुत कुछ सीखते हैं।
4. सांस और ध्यान की आसान प्रैक्टिस करें
बच्चों को छोटी उम्र से ही कुछ आसान ब्रीथिंग से जुड़ी प्रैक्टिस करायी जा सकती है। इससे उन्हें कुछ समय शांत बैठने और अपने ध्यान को एक जगह लगाने की आदत बनाने में मदद मिल सकती है। बच्चों को प्यार और आसान तरीके से इसकी प्रैक्टिस कराएं, ताकि वे अपने के हिसाब से इसे समझ और अपना सकें।
5. बच्चों पर प्रेशर न डालें
बच्चों को अच्छी आदतें सिखाने के लिए उन्हें बार-बार समझाना सही नहीं, बल्कि खुद उस काम को करना है। घर का माहौल जितना शांत, खुश और पॉजिटिव होगा, बच्चे उतना ही आसानी से अच्छी बातें सीख पाएंगे। उन्हें हर छोटी बात के लिए डांटने या मजबूर करने के बजाय प्यार से समझाना और खुद करके दिखाना ज्यादा असरदार हो सकता है।
सद्गुरु की इन सीखों को बच्चों के डेली रूटीन में शामिल करके उनमें छोटी उम्र से ही अच्छी आदतें सिखाई जा सकती हैं। ये सभी सीख बच्चों को डिसिप्लिन और इंडिपेंडेंट रहने में मदद कर सकती है। साथ ही, माता-पिता अगर खुद भी इन आदतों को अपनाएं और बच्चों पर ज्यादा प्रेशर न डालें, तो बच्चे चीजों को आसानी से समझ सकते हैं।