स्टडी टाइम और होमवर्क बनेगा फन टाइम! इन 7 आसान तरीको से बच्चे खुद करने लगेंगे पढ़ाई

होमवर्क का नाम सुनते ही आपका बच्चा मुंह बनाने लगे, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। थोड़े से समझदारी भरे बदलावों से पढ़ाई का समय बच्चों के लिए कम स्ट्रेस वाला और ज्यादा आसान बनाया जा सकता है। इससे न सिर्फ रोज होने वाली बहस कम होगी, बल्कि बच्चा धीरे-धीरे पढ़ाई को लेकर ज्यादा जिम्मेदार और आत्मनिर्भर भी बन सकता है।

अपडेटेड Sep 09, 2026 पर 7:00 AM
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होमवर्क के समय बच्चों को बैठाना कई माता-पिता के लिए रोज चैलेंजिंग हो जाता है। कभी बच्चा पढ़ने का मन नहीं करता, तो कभी छोटी-सी बात पर चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे में डांटने या प्रेशर बनाने के बजाय पढ़ाई का माहौल थोड़ा आसान और ऑर्गेनाइज बनाना ज्यादा मददगार हो सकता है। कुछ छोटी-छोटी आदतों से होमवर्क करने को स्ट्रेस फ्री बनाया जा सकता है और बच्चे में धीरे-धीरे खुद पढ़ने की अच्छी आदत भी डेवलप हो सकती है।

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1. एक रूटीन बनाएं

बच्चे के होमवर्क के लिए रोज एक तय समय रखें। कोशिश करें कि वह हर दिन लगभग उसी समय और एक ही जगह पर पढ़ाई करे। इससे बच्चे को पहले से पता रहेगा कि कब उसे खेलना या टीवी देखना छोड़कर पढ़ाई शुरू करनी है। शुरुआत में उसे रूटीन की आदत डालने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वह खुद उस समय पढ़ाई के लिए तैयार होने लगेगा।

 

 

2. पढ़ने की जगह साफ रखें

पढ़ाई के लिए ऐसी जगह चुनें जहां ज्यादा शोर न हो और बच्चा आसानी से ध्यान लगा सके। डेस्क पर सिर्फ जरूरी किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी रखें। खिलौने, मोबाइल फोन, टैबलेट या ऐसी दूसरी चीजें दूर रखें जो उसका ध्यान बार-बार भटका सकती हैं। क्लीन और ऑर्गेनाइज जगह होने से बच्चे को पढ़ाई पर फोकस करने में आसानी होती है।

 

 

3. बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटें

अगर बच्चे को एक साथ बहुत सारा होमवर्क या कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिल जाए, तो उसे देखकर वह घबरा सकता है। ऐसे में पूरे काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दें। उदाहरण के लिए, पहले गणित के सवाल, फिर हिंदी की कॉपी और उसके बाद प्रोजेक्ट का काम। एक-एक करके काम पूरा करने से बच्चा परेशान कम होगा और उसे अपना काम आसान लगेगा।

 

 

4. बीच में शार्ट ब्रेक दें

बच्चे से लगातार लंबे समय तक पढ़ने की उम्मीद न करें। कुछ देर पढ़ने के बाद छोटा ब्रेक देना उसके लिए फायदेमंद हो सकता है। उदाहरण के लिए, करीब 20 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक दिया जा सकता है। इसमें बच्चा थोड़ा चल सकता है, पानी पी सकता है या आंखों को आराम दे सकता है। बस ब्रेक इतना लंबा न हो जाए कि बच्चा फिर से पढ़ाई न करना चाहे।

 

 

5. उसे खुद करने का मौका दें

बच्चे को हर सवाल का जवाब तुरंत बताने के बजाय पहले खुद सोचने और कोशिश करने का मौका दें। वह किसी सवाल पर अटक जाए, तो डायरेक्ट आंसर देने के बजाय हिंट देकर उसकी मदद करें। इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और उसे खुद प्रॉब्लम सॉल्व करने की आदत होगी। धीरे-धीरे वह मुश्किल सवालों को समझने की कोशिश करेगा।

 

 

6. खुद भी शांत रहें

होमवर्क करते समय बच्चा परेशान हो जाए, गलती करे या किसी सवाल को बार-बार गलत करे, तो गुस्सा करने से सिचुएशन और बिगड़ सकती है। ऐसे समय पर अपनी आवाज शांत रखें और उसे समझाएं कि गलती होना सामान्य बात है। उसे यह महसूस कराएं कि वह कोशिश कर रहा है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। माता-पिता का शांत आवाज बच्चे का स्ट्रेस कम करती है।

 

 

7. बच्चे की मेहनत की करें तारीफ

सिर्फ अच्छे नंबर आने पर ही बच्चे की तारीफ न करें, बल्कि उसकी मेहनत और कोशिश को भी महत्व दें। उसने खुद कोई मुश्किल सवाल हल किया है या बिना याद दिलाए अपना होमवर्क पूरा किया है, तो उसकी तारीफ करें। इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ता है और वह आगे भी मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए मोटिवेट होता है।

बच्चों के लिए पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाय उसे उनकी रोज की जिंदगी का नेचुरल पार्ट बनाना जरूरी है। माता-पिता का सपोर्ट और सही माहौल बच्चे के मन से पढ़ाई का डर कम कर सकता है। इस तरह धीरे-धीरे बच्चा जिम्मेदारी समझने लगता है और पढ़ाई को लेकर उसका भरोसा भी बढ़ता है।

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