बचपन से ही स्मार्ट बनेंगे बच्चे! पेरेंट्स आज ही शुरू कराएं ये 5 आसान काम, कभी नहीं होगी पैसों की तंगी

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बड़ा होकर स्मार्ट बने, तो उसे कुछ आदतें बचपन से ही डालनी चाहिए। बच्चों को फाइनेंशियल मामलों में स्मार्ट फैसले लेने के लिए बचपन से ही तैयार करना चाहिए। आइए जानें बच्चों को बचपन से कौन से 5 काम कराएं, ताकि उन्हें कभी पैसों की तंगी न झेलनी पड़े

अपडेटेड Aug 21, 2026 पर 5:12 PM
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पैसा जरूरतें पूरी करने, बचाने और अपने सपने पूरे करने के लिए भी बेहद जरूरी है।

बच्चों में बचपन से ही पैसों की सही समझ और अच्छी आदतें डालना उन्हें भविष्य में वित्तीय रूप से समझदार और स्वतंत्र बनाता है। शुरुआती फाइनेंशियल लिटरेसी बच्चों को पैसे के स्मार्ट फैसले लेने में मदद करती है। पैसों का सही इस्तेमाल समझना कितना जरूरी है, ये उन्हें तभी समझ जाएगा, जब वे खुद पैसा संभलेंगे। लेकिन इसके लिए उन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी हम बड़ों की है। पैसा सिर्फ जरूरतें पूरी करने के लिए ही नहीं, बल्कि बचाने और अपने सपने पूरे करने के लिए भी बेहद जरूरी है। पेरेंट्स आज से ही इन 5 आसान तरीकों को अपनाकर अपने बच्चों को पैसों के मामले में स्मार्ट बना सकते हैं:

थ्री-जार सिस्टम : बच्चों को कुछ पैसे दें, जिसे वे तीन हिस्सों में बांटें। इनमें एक बचत का, एक खर्च का और तीसरा दान का होना चाहिए। यह तरीका बच्चों को सिखाता है कि सब कुछ तुरंत खर्च करने के बजाय सोच-समझकर पैसे का इस्तेमाल करने से एक मजबूत नींव बनती है।

ग्रोसरी लिस्ट चैलेंज : अपने बच्चे को एक छोटा बजट और एक खास ग्रोसरी लिस्ट दें। उन्हें सुपर मार्केट में अपनी लिस्ट और बजट के हिसाब से चीजों का चुनाव करने दें। इससे उन्हें स्टोर ब्रांड की तुलना नामी ब्रांड से करनी आएगी, कीमतों में अंतर समझ आएगा और कुल बिल को बजट में रखने के लिए फैसले लेने की समझ बढ़ेगी।

सेविंग्स गोल मैच करना : अपने बच्चे को लंबे समय के किसी लक्ष्य के लिए पैसे बचाने और उसमें अपनी तरफ से कुछ जोड़ने का ऑफर दें। जैसे उसकी हर 10 रुपये की बचत पर आप उसे एक रुपया देंगे। यह कंपाउंड इंटरेस्ट और इंसेंटिव स्ट्रक्चर के बारे में जानकारी देता है। साथ ही सोच-समझकर बचत की आदत को बढ़ावा देता है।

जरूरतों और चाहतों में अंतर समझाएं : बच्चों को सिखाएं कि 'जरूरत' (जैसे पढ़ाई, खाना, कपड़े) और 'चाहत' (जैसे महंगे खिलौने, वीडियो गेम) में क्या फर्क होता है। जब भी वे किसी नई चीज की जिद्द करें, तो उनसे पूछें कि क्या यह उनकी जरूरत है या सिर्फ एक चाहत।

डिजिटल और बेसिक बैंक अकाउंट से जोड़ें : थोड़े बड़े बच्चों के लिए 'माइनर सेविंग्स अकाउंट' खुलवाएं। उन्हें बैंक की कार्यप्रणाली, पासबुक अपडेट करना और डिजिटल लेन-देन के सुरक्षित तरीकों के बारे में बुनियादी जानकारी दें।


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