लाइक्स और तारीफ के गुलाम मत बनो! सिस्टर शिवानी ने बताया खुश रहने का सीक्रेट

BK सिस्टर शिवानी का यह विचार हमें याद दिलाता है कि जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले अपने अंदर ध्यान देना जरूरी है। बाहरी चीजों, दिखावे और दूसरों की राय पर ज्यादा ध्यान देने के बजाय अपनी सोच, भावनाओं और मन की शांति पर काम करना चाहिए। जैसे मजबूत बीज से मजबूत पेड़ बनता है, वैसे ही मजबूत अंदरूनी व्यक्तित्व से जिंदगी के बाकी हिस्से भी बेहतर हो सकते हैं। थोड़ा समय खुद के लिए निकालना इस दिशा में एक आसान शुरुआत हो सकती है।

अपडेटेड Aug 13, 2026 पर 3:50 PM

आजकल लोग जिंदगी में नौकरी, पैसे, रिश्तों, लुक्स और सोशल मीडिया जैसी बाहरी चीजों पर बहुत ध्यान देने लगे हैं। हम चाहते हैं कि हमारी जिंदगी दूसरों को अच्छी और खुशहाल नजर आए, लेकिन इसी बीच कई बार अपने मन और भावनाओं को समझना भूल जाते हैं। BK सिस्टर शिवानी का यह विचार हमें याद दिलाता है कि जिंदगी में सच्चा बदलाव बाहर से नहीं, बल्कि अंदर से शुरू होता है। जैसे किसी पेड़ को मजबूत बनाने के लिए उसकी जड़ों का मजबूत होना जरूरी है, वैसे ही एक खुश और बैलेंस्ड लाइफ के लिए हमारे विचार और भावनाएं मजबूत होना जरूरी हैं।

उनकी बात को आसान तरीके से समझें तो बीज अच्छा होगा, तभी पेड़ भी मजबूत होगा। यहां बीज हमारे मन, सोच और अंदर की ताकत का प्रतीक है, जबकि पेड़ हमारी पूरी जिंदगी को दिखाती है। इसलिए हर बार बाहर की सिचुएशन को बदलने की कोशिश करने के बजाय पहले खुद की सोच और भावनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

 


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1. पहले खुद को समझें

जिंदगी में कोई परेशानी आने पर हम बाहर की चीजों को बदलने की कोशिश करते हैं। हमें लगता है कि नौकरी बदलने, जगह बदलने या किसी दूसरे व्यक्ति के व्यवहार को बदलने से सब ठीक हो जाएगा। लेकिन कई बार असली परेशानी हमारी सोच, गुस्से, डर या चिंता में छिपी होती है। इसलिए सबसे पहले अपने मन को समझना जरूरी है। जब अंदर से हम शांत और मजबूत होते हैं, तो बाहर की परेशानियों को संभालना भी आसान हो जाता है।

2. सोच और भावनाओं पर ध्यान

हम दूसरों की राय, तारीफ और सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स को काफी महत्व देने लगते हैं। इससे हमारी खुशी भी कई बार दूसरों के व्यवहार पर निर्भर हो जाती है। सिस्टर शिवानी की सीख है कि अपनी खुशी के लिए हमेशा बाहर की चीजों पर निर्भर रहने के बजाय खुद पर ध्यान देना चाहिए। दिन में थोड़ा समय शांत बैठने, अपनी भावनाओं को समझने, मेडिटेशन करने या खुद से बात करने में लगाएं। इससे धीरे-धीरे खुद को समझने और अपनी फीलिंग को संभालने की एबिलिटी बढ़ सकती है।

3. बदलाव की शुरुआत खुद से

जिस तरह पेड़ की जड़ें मजबूत हों तो वह गर्मी, बारिश और तेज हवा में भी खड़ा रह सकता है, उसी तरह अंदर से मजबूत इंसान भी मुश्किल समय को बेहतर तरीके से संभाल पाता है। इसके लिए रोज बहुत ज्यादा समय निकालना जरूरी नहीं है। कुछ समय ध्यान, टहलने, अच्छी किताब पढ़ने या अपनी दिनभर की बातों को लिखने में लगाया जा सकता है। ये छोटी-छोटी आदतें मन को शांत रखने और खुद के साथ बेहतर जुड़ने में मदद कर सकती हैं।

4. खुद को समय दें

हम हमेशा चाहते हैं कि हमारे रिश्ते अच्छे हों, काम में सफलता मिले और जिंदगी में ज्यादा खुशी आए। इसके लिए हम बाहर की सिचुएशन को बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब हमारी सोच और व्यवहार में बदलाव आता है, तो वही सिचुएशन हमें अलग नजर आने लगती हैं। गुस्से की जगह समझदारी, चिंता की जगह शांति और जल्दबाजी की जगह सोच-समझकर फैसला लेने की आदत बन सकती है। इसलिए जिंदगी में बदलाव लाने के लिए शुरुआत हमेशा खुद से करना बेहतर होता है।

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