आजकल पौधों की देखभाल के लिए लोग कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। चावल को धोने के बाद बचा हुआ पानी फेंकने के बजाय कई लोग इसे पौधों में डालते हैं। इसमें मौजूद स्टार्च और कुछ पोषक तत्वों की वजह से इसे पौधों के लिए फायदेमंद माना जाता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार चावल धोने का पानी पौधों में डाल दिया जाए। गमलों में जरूरत से ज्यादा पानी देने से मिट्टी लगातार गीली रह सकती है, जिससे पौधे की जड़ों पर असर पड़ सकता है। इसलिए चावल का पानी इस्तेमाल करने से पहले यह जानना जरूरी है कि इसे कब, कितनी मात्रा में और किस तरह पौधों में डालना सही रहेगा।
1. कम मात्रा से शुरुआत
छोटे गमलों में चावल का पानी डालते समय ज्यादा सावधानी रखें, क्योंकि इनमें पानी जल्दी जमा हो सकता है। गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद होना जरूरी है। हर पौधे की पानी की जरूरत अलग होती है। पहली बार इस्तेमाल कर रहे हैं तो कम मात्रा से शुरुआत करें और पौधे की मिट्टी, पत्तियों और ग्रोथ पर ध्यान रखें।
2. सादा पानी इस्तेमाल करें
पौधों में वही चावल का पानी डालें जिसमें सिर्फ सादे चावल धोए गए हों। यदि पानी में नमक, तेल, मसाला या साबुन जैसी कोई चीज मिली है, तो उसे गमले में डालने से बचें। ऐसी चीजें मिट्टी की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती हैं और पौधे की जड़ों के लिए सही नहीं हैं।
3. ज्यादा पानी का पौधों पर असर
चावल का पानी बार-बार डालने से गमले की मिट्टी लगातार गीली रह सकती है। इससे जड़ों को सही मात्रा में हवा नहीं मिल पाती और जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर पौधे की पत्तियों पर भी दिख सकता है, जैसे पत्तियां पीली पड़ना या ग्रोथ धीमी होना। इसलिए इसे रोज या बहुत ज्यादा मात्रा में डालने से बचें।
4. फफूंद दिखे तो सावधान रहे
चावल के पानी में स्टार्च होता है, इसलिए इसे बार-बार मिट्टी में डालने से कुछ मामलों में मिट्टी की ऊपर फफूंद जैसी लेयर दिखाई दे सकती है। यदि ऐसी लेयर लगातार बढ़ रही है, तो कुछ समय के लिए चावल का पानी देना बंद कर दें और मिट्टी को सूखने का मौका दें।
चावल धोने का पानी पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन इसे पौधों की खाद समझकर रोज डालना भी सही नहीं है. अगर इस्तेमाल करना है तो सादे चावल का साफ पानी लें, उसे ठंडा होने दें और कभी-कभार ही मिट्टी में डालें. सबसे जरूरी है कि गमले में पानी जमा न हो. पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय धूप, सही मिट्टी, पानी और जरूरत के हिसाब से खाद का भी ध्यान रखें.