
रूम फ्रेशनर से खुशबू के साथ कुछ VOCs यानी वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स भी हवा में फैल सकते हैं। थोड़ी मात्रा में इस्तेमाल करने से नुकसान नहीं है, लेकिन लंबे समय तक इनके कॉन्टैक्ट में रहने से परेशानी हो सकती है। फ्रेशनर स्प्रे करने के बाद खांसी, गले में जलन, सांस लेने में दिक्कत या घुटन महसूस हो, तो तुरंत ताजी हवा वाली जगह पर जाएं। छोटे और बंद कमरे में बहुत ज्यादा स्प्रे करने से बचना बेहतर है।
2. बच्चों से दूर रखें
रूम फ्रेशनर जैसे लिक्विड रिफिल, रीड डिफ्यूजर, जेल और फ्रेगरेंस बीड्स बच्चों की पहुंच में नहीं होने चाहिए। कुछ बीड्स देखने में अट्रैक्टिव लग सकते हैं, जिससे बच्चा उन्हें गलती से मुंह में डाल सकता है। रूम फ्रेशनर का लिक्विड निगलने पर मुंह और पेट में जलन, मतली या उल्टी जैसी परेशानी हो सकती है। बच्चा गलती से इसे निगल ले, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
3. प्लग-इन और ऑटोमैटिक स्प्रे में सावधानी
प्लग-इन फ्रेशनर को ऐसी जगह लगाएं जहां बच्चे या पालतू जानवर आसानी से उसे छू न सकें। इस्तेमाल से पहले पैकेज पर दिए इंस्ट्रक्शन जरूर पढ़ें। वहीं, कुछ ऑटोमैटिक स्प्रे और एयरोसोल फ्रेशनर में जलने वाले तत्व हो सकते हैं। इसलिए इन्हें माचिस, मोमबत्ती, गैस या सिगरेट जैसी खुली आग से दूर रखें।
4. स्किन या आंख के लिए सावधानी
यदि रूम फ्रेशनर स्किन पर गिर जाए, तो अफेक्टेड एरिया को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इससे जलन, लालिमा या एलर्जी जैसी परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है। फ्रेशनर आंख में चला जाए, तो आंख को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। धोने के बाद भी जलन बनी रहे, तो डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं।
रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से और कम मात्रा में करना बेहतर है। कमरे को बंद करके लगातार फ्रेशनर चलाने के बजाय खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन बनाए रखें। बदबू को सिर्फ फ्रेशनर से छिपाने के बजाय उसका असली कारण जानें। फिर भी यदि परेशानी बनी रहे तो इसका इस्तेमाल करना बंद कर दें।
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