
बच्चे बोलकर नहीं बता सकते कि उनका पेट भर गया है, लेकिन वे अपने हाव-भाव से यह जरूर जताते हैं। बच्चा खाना खाते समय मुंह फेरने लगे, मुंह बंद कर ले, खाने में दिलचस्पी कम कर दे या खाना दूर करने लगे, तो यह पेट भरने का संकेत हो सकता है। कई बार बच्चा हाथ-पैर ढीले कर देता है, ध्यान दूसरी तरफ करने लगता है या खाने से खुद दूरी बनाने लगता है। ऐसे छोटे-छोटे संकेतों को समझकर पेरेंट्स बच्चे को जरूरत से ज्यादा खिलाने से बच सकते हैं।
बच्चे को खाना खिलाते समय यह जरूरी नहीं है कि वह प्लेट में रखा पूरा खाना खत्म करे। कई बार पेरेंट्स खाना बच जाने पर बच्चे को थोड़ा और खाने के लिए कहते रहते हैं, लेकिन बच्चा खाने में दिलचस्पी न दिखाए, तो हो सकता है कि उसका पेट भर गया हो। बच्चे को आराम से और बिना जल्दबाजी के खाना खिलाएं, ताकि वह अपनी भूख के हिसाब से खा सके और खुद बता सके कि उसे अब और खाना चाहिए या नहीं।
3. रोने का मतलब नहीं होता है भूख
बच्चे के खाने की आदतों में हर दिन थोड़ा बदलाव आ सकता है। कभी बच्चा कम खाना खाता है, तो कभी अपनी पसंद की चीज देखकर ज्यादा खाने की इच्छा दिखा सकता है। इसलिए हर बार प्लेट पूरी खत्म न करने को यह मानना जरूरी नहीं कि बच्चे ने ठीक से खाना नहीं खाया। कई बार बच्चा भूख न लगने पर खाना छोड़ देता है या पेट भरने के बाद खुद खाने से दूरी बनाने लगता है। ऐसे में पेरेंट्स को बच्चे के भूख और पेट भरने के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए और उसे जबरदस्ती खिलाने से बचना चाहिए।
4. जबरदस्ती खिलाने से बचे
छोटे बच्चों में खाना खाने के बाद थोड़ा खाना मुंह से बाहर आ जाना या उल्टी जैसा होना कभी-कभी नॉर्मल हो सकता है। सिर्फ इस एक बात से यह नहीं माना जा सकता कि बच्चे ने जरूरत से ज्यादा खाना खा लिया है। लेकिन बच्चा बार-बार या तेज उल्टी करे, खाना खाने से मना करे, बहुत ज्यादा सुस्त लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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